जोधपुर।
जोधपुर में वर्षों पूर्व आवंटित क्वारी लाइसेंसों के संचालन को लेकर अनियमितताएं बरती जा रही है। खान विभाग व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनदेखी से अधिकांश क्वारी लाइसेंसों में नियम विरूद्ध स्टोन कटिंग इकाइयां चल रही है। इन इकाइयों से निकलने वाला वेस्ट, स्लरी भूमि व जल में मिलकर पर्यावरण के साथ आमजन को नुकसान पहुंचा रही है। सूरसागर, फिदूसर, चौपड़, कालीबेरी, पाबूमगरा, केरू सहित शहर के अनेक क्षेत्रों में क्वारी लाइसेंसों में स्टोन कटिंग इकाइयां चल रही है।राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर से औद्योगिक इकाइयों को ‘स्थापित करने की सहमति’ व ‘संचालित करने की सहमति’ जारी करने के लिए निर्धारित गाइडलाइन जारी की हुई है। मण्डल के अधिकारियों ने गाइडलाइन को दरकिनार कर सहमति जारी कर दी है। क्वारी लाइसेंसों में चल रही स्टोन कटिंग इकाइयों का नवीनीकरण नहीं होने के बाद भी स्टोन कटिंग इकाइयां चल रही है। नवीनीकरण नहीं होने से वे इकाइयां स्वत समाप्त हो जाती है, जिनको खान विभाग को अपने कब्जे में लेना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। नवीनीकरण की कई शर्तों की पालना क्वारी लाइसेंसधारक नहीं कर पा रहे है।
---
शर्ते पूरी करने पर ही स्वीकृति का प्रावधान
स्टोन कटिंग यूनिट को ‘स्थापित करने की सहमति’ व ‘संचालित करने की सहमति’ जारी करने के लिए 26 जून 2012 को मण्डल ने गाइडलाइन जारी की थी। इसके अनुसार जमीन आवंटन पत्र, भू-रूपांतरण पत्र, इकाई स्थापित करने की सहमति के लिए वाटर एक्ट 1974 व एयर एक्ट 1981 के तहत निर्धारित प्रारूप में निर्धारित शुल्क सहित आवेदन पत्र, प्रदूषण नियंत्रण मापदंडों, जल निकासी, अलग-अलग कार्यो के लिए जल उपभोग, प्रदूषित जल के उपचारित करने का स्त्रोत आदि का विवरण, स्टोन कटिंग से निकलने वाली स्लरी के निस्तारण की मात्रा व इसके पुन उपयोग व निस्तारण की व्यवस्था आदि की जानकारी, स्टोन कटिंग व स्लरी के पुन उपयोग का एक्शन प्लान एवं इकाई से उत्पादन क्षमता का जिला उद्योग केन्द्र से स्वीकृति प्रमाण पत्र सहित करीब 13 बिन्दु अनिवार्य है। इन मापदंडों को पूरा करने पर ही सहमति जारी करने का प्रावधान है।
---------
खान विभाग से स्वीकृति मिली है तो उन क्वारी लाइसेंसों पर स्टोन कटिंग इकाइयां चल सकती है। बिना स्वीकृति अवैध संचालन माना जाएगा और उन पर नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।
बीआर पंवार, क्षेत्रीय अधिकारी
राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल जोधपुर
--
ऐसे प्रकरण जानकारी में है। नवीनीकरण नहीं कराने वाली इकाइयों को चिन्हित कर कार्यवाही कर रहे है। पर्यावरणीय स्वीकृति के बिना संचालन नहीं हो सकता, जो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जारी करता है।
श्रीकृष्ण शर्मा, माइनिंग इंजीनियर
--
इस प्रकरण पर पर्यावरण विभाग के द्वारा जारी कंसेंट टू ऑपरेट तथा कंसेंट टू एस्टेब्लिश के खिलाफ शिकायत की लेकिन विभाग की ओर से कार्यवाही नहीं की गई। फलस्वरूप पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है।
महेन्द्र बोहरा, शिकायतकर्ता
---------
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/39Q2GJ8
0 comments:
Post a Comment