कॉमिक्स से कर रहे  बच्चों को  कोराना से जागरुक

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जोधपुर. इन दिनों कोरोना वायरस का खौफ हर किसी के चेहरे पर नजर आ रहा है। वायरस के खतरे से बचने के लिए जहां इन दिनों शासन, प्रशासन की ओर से अवेयरनेस प्रोग्राम चलाया जा रहा है। वहीं शहरवासी भी एक-दूसरे को सचेत करने में जुटे हुए हैं। इन सबके परे नन्हें-मुन्हें बच्चों में भी वायरस के प्रति जानने की जिझासा काफी ज्यादा है। ऐसे में बच्चों की जिज्ञासा को शांत करने व कोरोना वायरस को लेकर जागरूक करने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से खास कॉमिक्स जारी की गई है जो सोशल मीडिया पर भी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। कॉमिक्स में संक्रमण को रोकने सहित विभिन्न सवालों के जवाब भी दिए हुए हैं। जिसे बच्चों में काफी पसंद किया जा रहा है।

रोचक तरीके से दी जानकारी

पीजीआई में पर्यावरण स्वास्थ्य के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रविंद्र खाईवाल व पंजाब विश्वविद्यालय के पर्यावरण अध्ययन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुमन मोर ने इसे तैयार किया है। हेल्थ मिनिस्ट्री के ट्वीट में कहा गया है कि कॉमिक किड्स, वायु और कोरोना, कौन लड़ाई जीतता है? इस कॉमिक्स से कोविड-19 सहित अन्य वायरस, स्वाइनफ्लू, बर्ड फ्लू की जानकारी बच्चों को रोचक व आसान तरीके से दी गई है। मंत्रालय की वेबसाइट से भी इसे डाउनलोड किया जा सकता है। स्वास्थ्य मंत्रालय विभिन्न भारतीय भाषाओं में भी इस कॉमिक्स का अनुवाद करने की योजना बना रहा है। जल्द ही यह कॉमिक्स अन्य भाषाओं जैसे हिंदी और पंजाबी में भी उपलब्ध हो सकेगी।

हास्य के साथ मनोरंजन भी

कॉमिक्स में हास्य व मनोरंजन तरीखे का उपयोग किया गया है। जिससे बच्चों को कोरोना और अन्य संक्रामक कीटाणुओं को हराकर रोकथाम का नायक बनने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। कॉमिक्स की शुरुआत पिता व बच्चे के बीच बातचीत से की गई है। बच्चे टीवी में कोरोना वायरस की ब्रेकिंग न्यूज देखते हैं तो पिता से पूछते हैं कि यह क्या है। पिता उन्हें पूरी जानकारी नहीं दे पाते। तब वह अपने सुपर हीरो वायु को बुलाते हैं। वायु उन्हें कोरोना वायरस के बारे में पूरी जानकारी देने के साथ ही उससे बचने के उपायों की जानकारी देता है।

पिक्चर व संवाद जागरूक करने में कारगर
आजकल के बच्चों की कॉमिक्स करेक्टर में खासी रूचि है। छोटे बच्चे कार्टून करेक्टर देखते हैं तो उससे दिमाग पर असर पड़ता है। कॉमिक्स में भी पिक्चर व संवाद दोनो होता है जो बच्चों के लिए समझने में आसान होने के साथ ही जागरूक करने में भी मददगार साबित होता है।

-डॉ. सुरेंद्र कुमार, सहायक आचार्य, मनोचिकित्सा विभाग एमडीएम



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