जोधपुर/बेलवा. जोधपुर जिले में कुदरत का कहर किसानो के अरमानो पर आफत बनकर बरस रहा है। बेमौसम की आंधी, बारिश व ओलावृष्टि ने ग्रामीण क्षेत्रो मे जन-जीवन को प्रभावित कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रो मे तो गुरुवार दिन के बाद रात्रि को भी अंधड़ व बारिश ने सितम ढाया और किसानो की खड़ी फसलो को चौपट कर दिया। यही नहीं तेज अंधड़ के कारण पेड़ धराशाही हो गए, तो वहीं छप्परे व होर्डिग्स उड़ गए।
आंधी व मूसलाधार बारिश ने किसानों की खड़ी फसल को बर्बाद कर दिया। जिससे मारवाड़ी गीत की पंक्तियां ''मत बाओ म्हारा परण्या जीरो'' ''ओ जीरो जीव रो बेरी रे'' जिसमें पकी जीरे की फसल के बर्बादी का जिक्र करते एक किसान महिला अपने पति से जीरे की फसल की बुवाई नही करने की बात कह रही है। नलकूपों पर वर्तमान में सिचिंत रबी की फसल पक चुकी थी और किसान पक्की फसल की कटाई में लगे हुए थे। गौरतलब है कि पाकिस्तान से आये टिड्डी दल ने भी क्षेत्र के खेतों में नुकसान पहुंचाया था।
हालांकि इस बार अच्छी फसल होने से मुनाफा कमाने की आस मे बैठे किसानों के अरमानों को बैमौसम बारिश ने चकनाचूर कर दिया। नलकूपों पर ईसब व जीरे की फसल पूरी तरह पकी हुई थी तथा फसल की कटाई का कार्य चालू था। कही काश्तगारों ने फसल काटकर एकत्रित भी कर ली थी, लेकिन लगभग आधा घंटा मूसलाधार बारिश ने खड़ी ईसब की फसल को तहस-नहस कर दिया व काटकर एकत्रित की हुई फसल भी बारिश की भेट चढ़ गई। किसानों की ईसब, जीरा, जीरा, रायड़ा गेहू की खड़ी फसलें बर्बाद हो गई।
बारिश के बाद शुक्रवार सुबह अन्नदाता जब खेत मे पहुंचे तो नुकसान देखकर अपने भाग्य को कोस रहे थे। ऎसे में किसानों को सेठ साहुकारों के साथ बैंकों का कर्जा चुकाने की चिंता सताने लगी है। हालांकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट कर प्रदेश में हुए खराबे के आंकलन के लिए जल्द ही गिरदावरी के लिए मुख्य सचिव को निर्देश दिए है। सीएम गहलोत ने कहा कि इस संकट की घड़ी में सरकार किसानों के साथ खड़ी है।
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