भद्रामुक्त प्रदोषकाल में शाम 6.40 बजे से रात 8.12 के मध्य होलिका दहन, कल खेली जाएगी धुलंडी

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नंदकिशोर सारस्वत/जोधपुर. प्रेम सद्भाव का संदेशवाहक होली का त्योहार सोमवार को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। पं ओमदत्त शंकर ने बताया कि सोमवार को दोपहर 1.10 बजे भद्रा समाप्त होने के बाद पूरा दिन श्रेष्ठ रहेगा। जोधपुर में प्रदोष का समय 6.40 बजे से आरंभ होगा। प्रदोषकाल में शाम 6.40 बजे से चौघडि़ए मिलने के कारण 6.52 तक प्रदोष में सर्वश्रेष्ठ व इसके बाद रात 8.12 के मध्य चर चौघडि़ए में होलिका दहन किया जा सकता है। पूर्णिमा तिथि रात्रि 11.17 बजे तक रहेगी।

धुलंडी मंगलवार को मनाई जाएगी। लोग एक दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर शुभकामनाएं देंगे। इस दिन विभिन्न समाज की ओर से नवजात शिशुओं का ढूंढोत्सव और शाम को रामा-श्यामा करने की परम्परा का निर्वहन किया जाएगा। जोधपुर परकोटे के भीतरी शहर में चंग की थाप पर पारम्परिक श्लील गाली गायन के दौरान गेर टोलियां धमाल मचाएंगी। महिलाओं के सामूहिक व्रत और पूजन का उत्सव गणगौर भी धुलंडी से आरंभ हो जाएगा।

आपसी रिश्तों में प्रेम सद्भाव का संदेशवाहक रंगों का दो दिवसीय त्योहार होली सोमवार से मनाया जाएगा। इस बार फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा के दिन होलिका दहन भद्रा रहित प्रदोषकाल में निर्विवाद रूप से होगा लेकिन कोरोना वायरस को लेकर जारी रेड अलर्ट का असर बाजार में बिकने वाले अबीर-गुलाल और पिचकारियों पर पड़ा है। इस बार विभिन्न समाज की ओर से वैदिक होली मनाए जाने की तैयारियां की गई हैं। शास्त्रोक्त मान्यतानुसार भद्रामुख में होलिका दीपन वर्जित माना गया है इसीलिए इस बार भद्रा रहित प्रदोषकाल में होलिका दहन किया जाएगा।

होली की झाळ से लगाएंगे भविष्य के मौसम का पूर्वानुमान
मारवाड़ में होली दहन के समय हवा के रूख और अग्नि की लपटों को देखकर आगामी मौसम के बारे में पूर्वानुमान लगाने की परम्परा का निर्वहन किया जाएगा। मेघमाला भड़ली ऋषि की कहावतों में प्रमुख रूप से ‘जले होलिका पश्चिम पौन...अन्न नीपजै चारों कोण तथा उत्तर वायु होलिका दहै..धूधूकार जमानै कहै..’ प्रचलित है। यदि होली की लपटें एकदम सीधी और ऊंची हो तो उसे अकाल की स्थिति का प्रतीक मानते है। शकुनशास्त्र में कहा गया है कि होली दहन के समय होली की लौ पूर्व दिशा की ओर हो तो सुखद, दक्षिण की ओर दुर्भिक्ष और पशु पीड़ादायक, नऋत्य दिशा में फसल की हानि और पश्चिम दिशा में हो तो सामान्तय तेजीप्रद मानी जाती हैं। घांची समाज के वरिष्ठ बुजुर्ग बालूराम धाणदिया ने बताया कि उत्तर व ईशान कोण में हो तो सुखद वर्षा और चारों दिशाओं में घूमने पर संकट का परिचायक हैं। होली की झाल यदि आकाश की ओर जाए तो उत्पाद है। तेज वायु वेग हो तो धन धान्य है।

गणगौर पूजन कल से
महिलाओं के सामूहिक व्रत और पूजन का उत्सव गणगौर भी 10 मार्च से आरंभ हो जाएगा। इस पर्व को जोधपुर में दो अलग-अलग नाम से मनाया जाता हैं। प्रथम पखवाड़े पूजे जाने वाली गणगौर घुड़ला गौर कहलाती है जबकि दूसरे पखवाड़े में धींगा गवर का पूजन किया जाएगा। घुड़ला गौर चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को स्थापित होकर उसी दिन से उसकी पूजा आरंभ होती है और चैत्र शुक्ल तीज तक चलती है।



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