अभिषेक बिस्सा/जोधपुर. राज्य सरकार एक तरफ हर-गली मोहल्लों में जनता क्लिनिक खोलने की तैयारी कर रही है और दूसरी ओर हर जिले में मेडिकल कॉलेज अस्पताल खोलने के सपने संजो रही है, लेकिन वास्तविकता ये है कि प्रदेश में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के बेड़े में साढ़े तीन हजार से अधिक चिकित्सकों की कमी चल रही है। इन पदों की कमियों के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग की सेवाओं का विस्तार भी ढंग से नहीं हो पा रहा है।
वरिष्ठ व कनिष्ठ विशेषज्ञों का टोटा, मेडिकल ऑफिसर्स के पद खाली
प्रदेश चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में 385 वरिष्ठ विशेषज्ञों के पद हैं, इनमें से 282 पद भरे हैं और 103 पद खाली है। वहीं कनिष्ठ विशेषज्ञों की बात करें तो 3150 पद स्वीकृत हैं, लेकिन कार्यरत 1866 और रिक्त 1284 है। इस कारण जिन जिलों में मेडिकल कॉलेज नहीं हैं, उन जगहों पर कई मरीजों को एमडी व एमएस जैसे विशेषज्ञ मरीजों को उपलब्ध नहीं हो पा रहे है। वहीं सीनियर मेडिकल ऑफिसर्स की बात की जाए तो 774 पद भरे हैं और 368 पद खाली पड़े हैं। 6224 मेडिकल ऑफिसर्स के पद में से 1944 पद रिक्त चल रहे हैं। इस कारण से ही कई पीएचसी चिकित्सकों की सुविधाओं से वंचित हैं।
जिलों में चिकित्सकों की कमी
जिला - रिक्त पद
जयपुर - 56
जोधपुर - 114
कोटा - 34
उदयपुर -140
अजमेर- 123
बीकानेर- 90
भरतपुर- 88
इस उपरोक्त सूची में सीनियर स्पेशलिस्ट,जूनियर स्पेशलिस्ट, एसएमओ,एमओ, डेंटल एसएमओ व डेंटल एमओ की रिक्तियां शामिल हंै।
इनका कहना
राज्य सरकार स्तर पर निरंतर भर्ती प्रक्रिया जारी है। सात सौ चिकित्सकों की नियुक्ति अंतिम चरण में है। सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर है।
- डॉ. बलवंत मंडा, सीएमएचओ
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