जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने अधीनस्थ अदालतों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करवाने के मामले में राज्य सरकार को काम पूरे होने की समयावधि के साथ तीन सप्ताह में स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत महांति और न्यायाधीश डॉ.पुष्पेंद्रसिंह भाटी की खंडपीठ में अतिरिक्त महाधिवक्ता संदीप शाह और करणसिंह राजपुरोहित के साथ विधि एवं विधिक कार्य विभाग के प्रमुख सचिव विनोद भारवानी, संयुक्त सचिव विधि मधुसूदन शर्मा सहित गृह और वित्त विभाग के संयुक्त सचिव पेश हुए।
पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने गृह सचिव व एसीएस वित्त को तलब किया था। उनकी ओर से पेश हाजिरी माफी का प्रार्थना पत्र खंडपीठ ने मंजूर कर लिया। पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने कहा था कि पूरे राज्य में 44 अदालतें किराए के परिसर में चलाई जा रही हैं, जिनमें से 20 जोधपुर में हैं। इन परिसरों के लिए किराए के माध्यम से एक बड़ी राशि खर्च की जा रही है। राज्य में 330 कोर्ट परिसर हैं लेकिन उनमें से 312 को नए भवनों की जरूरत है। निर्णय सुरक्षितमुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली खंडपीठ ने सभी तरह की अधीनस्थ अदालतों के लिए समान सामान्य भवन मानक विकसित करने के लिए एक कमेटी गठित करने के कोर्ट के पूर्ववर्ती आदेश पर निर्णय सुरक्षित रख लिया है।
पिछले साल खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि न्याय पालिका के परामर्श से प्रत्येक न्यायालय जैसे कि सिविल कोर्ट, आपराधिक न्यायालय, सत्र न्यायालय, परिवार न्यायालय, श्रम न्यायालय और मोटर वाहन दुर्घटना दावा अधिकरण के लिए समान सामान्य भवन मानक विकसित किए जाएं, ताकि बिल्डिंग कोड में शामिल होने से भविष्य में सार्वजनिक निर्माण विभाग या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा न्यायालय भवनों के निर्माण में इन मानकों को ध्यान में रखा जा सके। कोर्ट ने इसके लिए हाईकोर्ट को राज्य सरकार के साथ मंथन के बाद छह सप्ताह के भीतर एक कमेटी गठित करने को कहा था। इस मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से एक प्रार्थना पत्र पेश करते हुए कहा गया कि भवन कमेटी पूर्व में ही अस्तित्व में है, लिहाजा नई कमेटी का औचित्य नहीं है।
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