जोधपुर. राजस्थान के विभिन्न शहरों में हेरिटेज आर्किटेक्चर एवं संस्कृति को बचाए रखने व उनके संरक्षण के लिए स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर र एण्ड कलचरल हेरिटेज की आवश्यकता है। यह बात पूर्व सांसद गजसिंह ने कही। इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स, इंडिया जोधपुर लोकल सेन्टर के सभागार में दो दिवसीय हेरीटेज आर्किटेक्चर विषयक पर सेमिनार के उद्घाटन सत्र में यह बात कही।
इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरूआत मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलन व माल्यार्पण से हुई। लोकल सेंटर के चेयरमैन प्रो. अखिल रंजन गर्ग ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने बताया की यह सेमिनार दी इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स, इंडिया जोधपुर लोकल सेन्टर एवं एम.बी.एम. इंजीनियरिंग कालेज जोधपुर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किया जा रहा है। अध्यक्षता करते हुए ए.आर.डी.बी के चेयरमैन एच.के.मित्तल ने प्राचीन आर्किटेक्ट हेरिटेज संस्कृति हडप़्पा सभ्यता से आज के वर्तमान हेरिटेज के विभिन्न चरणों पर प्रकाश डाला।
मित्तल ने इसी विषय पर एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन जोधपुर में किए जाने की घोषणा की। जोधपुर लोकल सेन्टर के शताब्दी समारोह के प्रमुख प्रो. राजेश भदादा ने आज के हेरिटेज युग में प्राचीनकालीन भाषा का फिर से उपयोग करने पर जोर दिया। शहर के प्रमुख वास्तुकार पुलकित गुप्ता, संजय मेहता, हरेन्द्र बोहरा, अंशु अग्रवाल, प्ररमा शर्मा, महेन्द्र सिंह तंवर, प्रियंका मेहता को सम्मानित किया गया। समारोह को सफल बनाने कि लिए, प्रो. अखिल रंजन गर्ग, ई. घनश्याम प्रसाद वैष्णव, डॉ. कैलाश चौधरी, हरीश ख्यानी, अर्पित राय, डॉ. धमेंद्र पटेल, दिलशाद अली, एम.एल. कोकचा ने भूमिका निभाई।
पहले दिन कई तकनीकी सत्र
उदघाटन सत्र के बाद पहले दिन तीन तकनीकी सत्र हुए। पहले सत्र में निजी सीमेंट कंपनी के आर्किटेक्ट संजय मेहता ने उद्बोधन दिया। दूसरे सत्र में जीत कालेज के प्रो. कमलेश परिहार ने अपनी बात रखी। तीसरे सत्र में डॉ. महेन्द्र सिंह तंवर ने उद्बोधन दिया। पहले दिन तीन तकनीकी सत्रों के आलावा 15 तकनीकी पेपर प्रस्तुत किए गए। कल समापन सत्र में दो तकनीकी सत्रों में 10 पेपर प्रस्तुत किए जाएंगे।
आज भी होंगे तकनीकी सत्र
इस सेमिनार के दूसरे दिन रविवार को प्रात: मेहरानगढ़ दुर्ग का तकनीकी भ्रमण होगा। इसके बाद दो तकनीकी सत्र होंगे। इस समारोह में बिल्डिंग निर्माण में उपयोगी उत्पादों को जानी मानी कम्पनियों द्वारा प्रदर्शनी लगाई गई। विभिन्न सत्रों में हेरीटेज आर्किटेक्चर से सम्बन्धित पुरानी धरोहर का संरक्षण, धरोहरों के माध्यम से पर्यटन विकास व जल स्त्रोतों का संरक्षण करने के निर्देश दिए।
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