जेएनवीयू में पीजी में लेना है प्रवेश तो देनी पड़ेगी एंट्रेस परीक्षा, शुरू होंगे स्किल्ड डवलपमेंट कोर्सेस

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गजेंद्रसिंह दहिया/जोधपुर. जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में अब स्नातकोत्तर स्तर पर भी प्रवेश के लिए जद्दोजहद करनी होगी। विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर कक्षाओं में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा करवाई जाने का निर्णय लिया है। इसके अलावा विद्यार्थियों के लिए स्किल डेवलपमेंट कोर्सेज भी चलाए जाएंगे। जिसके लिए विश्वविद्यालय स्किल डेवलपमेंट विश्वविद्यालय के साथ एमओयू करेगा। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर प्रवीणचंद्र त्रिवेदी ने शनिवार को संकाय के विभागाध्यक्षों व अधिष्ठाता की बैठक ली। इसमें आगामी सत्र से कई नवाचारों को लेकर विचार मंथन किया गया। वहीं विश्वविद्यालय में शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाए जाने को लेकर कई नई योजनाओं पर चर्चा की गई।

अब पीजी में प्रवेश परीक्षा
कुलपति प्रोफेसर त्रिवेदी ने बताया कि स्नातक के बाद स्नातकोत्तर स्तर पर प्रवेश में काफी दिक्कतें सामने आती है। कई विद्यार्थियों को प्रवेश से वंचित होने की स्थिति भी हो जाती है। इसके चलते अब स्नातकोत्तर स्तर पर प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित करने पर विचार किया जा रहा है। जिस पर विभागाध्यक्षों ने भी सहमति जताई है। अब इस संबंध में एक कार्य योजना बनाई जा कर एकेडमिक काउंसिल व अन्य स्तरों पर इसे पारित करवाया जाएगा।

बायोमेट्रिक से होगी उपस्थिति
कुलपति ने विभागाध्यक्षों को सख्त निर्देश दिए हैं कि अब शिक्षकों की और कर्मचारियों की उपस्थिति बायोमेट्रिक से ही की जाएगी। जिसके लिए जिन विभागों में बायोमेट्रिक मशीनें खराब पड़ी है, उन विभागों में बायोमेट्रिक मशीन ठीक करवाने के लिए निर्देश दिए जा रहे हैं। हालांकि कुछ शिक्षकों ने अलग-अलग संकायों में कक्षाएं होने को लेकर दिक्कत बताई, लेकिन कुलपति ने बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज किए जाने पर ही सख्ती दिखाई।

स्किल डेवलपमेंट कोर्स चलाए जाएंगे
कुलपति प्रोफेसर त्रिवेदी ने बताया कि सरकार की ओर से स्थापित स्किल डेवलपमेंट विश्वविद्यालय के साथ एमओयू किया जाना प्रस्तावित किया गया है। जिसमें स्किल डेवलपमेंट कोर्सेज विश्वविद्यालय में स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों के लिए चलाए जाएंगे। स्किल डेवलपमेंट कोर्स इसके बाद छात्रों को ट्रेनिंग और प्लेसमेंट की सुविधा भी दी जाएगी। जिससे विश्वविद्यालय में अध्ययनरत छात्रों का अधिक से अधिक प्लेसमेंट हो पाए।

नवाचार पर दिया बल
कुलपति ने विभागाध्यक्षों और अधिष्ठाताओं को नवीन पाठ्यक्रम और पाठ्यक्रमों का परिमार्जन करने के भी निर्देश दिए हैं। वर्तमान के परिदृश्य के अनुरूप पाठ्यक्रमों में बदलाव किया जाएगा ताकि विद्यार्थियों को पुराने पाठ्यक्रम में अध्ययन करने की विवशता नहीं रहे।



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