जोधपुर. पिछले करीब 9 महीने से टिड्डी पर पेस्टीसाइड छिडक़ रहे देश के टिड्डी चेतावनी संगठन (एलडब्ल्यूओ) के तकनीशियनों पर अब इसके दुष्प्रभाव नजर आने लगे हैं। कई तकनीशियनों के शरीर में एसिटाइल कॉलिन एंजाइम बढ़ गया है, जिससे मस्तिष्क विकार से संबंधित शिकायतें मिल रही हैं। एलडब्ल्यूओ द्वारा केंद्र सरकार को इसकी सूचना देने पर ग्वालियर से रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के वैज्ञानिकों की टीम सोमवार को जोधपुर पहुंची। डीआरडीओ टीम ने पहले दिन 30 तकनीशियनों के रक्त के नमूने कॉलिन एस्टरेज टेस्ट के लिए एकत्रित किए हैं। टीम दो-तीन दिन तक यहीं रहकर 60 से अधिक टिड्डी तकनीशियन की जांच करेगी। जांच रिपोर्ट के बाद तकनीशियन का इलाज किया जाएगा। जोधपुर में यह जांच नहीं होती है।
क्या है एसिटाइल कॉलिन एंजाइम
मस्तिष्क में दो तंत्रिका कोशिकाओं के मध्य एसिटाइल कॉलिन एस्टरेज एंजाइम के कारण सूचनाओं का आदान-प्रदान होता है। यह एंजाइम मोटार न्यूरोन से स्त्रावित एसिटाइल कॉलिन एंजाइम का जल अपघटन करके सूचना के प्रवाह को बनाए रखता है। ऑर्गेनोफॉस्फेट प्रकार के पेस्टीसाइड एस्टरेज एंजाइम की क्रियाविधि पर रोक लगाता है, जिसके कारण तंत्रिका कोशिकाओं में एसिटाइल कॉलिन एंजाइम का स्त्रवण बढ़ता रहता है और मस्तिष्क में सूचनाओं का ट्रांसमिशन बंद हो जाता है।
3 लाख लीटर मैलाथिन छिडक़ा
भारत में 26 साल बाद 21 मई 2019 को टिड्डी रिपोर्ट की गई। तब से लेकर अब तक एलडब्ल्यूओ के 100 से अधिक तकनीशियन 3 लाख लीटर मैलाथिन पेस्टीसाइड का उपयोग कर चुके हैं। मैलाथिन ऑर्गेनोफास्फेट प्रकार का एक पेस्टीसाइड है जिसका शुरुआत में इस्तेमाल नर्व एजेंट के रूप में किया जाता था। ऑर्गेनोफास्फेट के अत्यधिक उपयोग से लकवा, कोमा, स्मृति दोष, दृष्टिदोष हो सकता है। इससे लार व आंसू का स्त्रवण बढ़ जाता है।
विश्व युद्ध में हिटलर ने किया था नर्व एजेंट के तौर पर इस्तेमाल
ऑर्गेनोफोस्फेट का पहली बार इस्तेमाल द्वितीय विश्व युद्ध के समय नाजी जर्मनी ने मित्र सेना के विरुद्ध किया था। हिटलर ने शत्रु सेनाओं पर रासायनिक हथियार के तौर पर ऑर्गेनोफास्फेट स्प्रे किया, जिससे कई सैनिक विकलांग हो गए। आज भी कई जगह किसान खेत में ऑर्गेनोफोस्फेट खाकर आत्महत्या करते हैं।
डीआरडीओ टीम कर रही है जांच
कई तकनीशियनों को शारीरिक समस्या पैदा हो गई थी, जिसके बाद डीआरडीओ की टीम जांच के लिए जोधपुर आई है। टीम दो तीन दिन तक 60 से 70 तकनीशियन के नमूने लेगी।
-डॉ. केएल गुर्जर, उप निदेशक, टिड्डी चेतावनी संगठन जोधपुर
आंख की छोटी पुतली देखकर करते है क्लिनिकल डायग्नोस
ऑर्गेनाफोस्फेट पेस्टीसाइड के दुष्प्रभाव से आंख की पुतली छोटी हो जाती है। हम इसी प्रकार से क्लिनिकल डायग्नोस करते हैं। अधिक पेस्टीसाइड उपयोग में लेने पर किसानों को यह समस्या हो जाती है।
-डॉ. शुभकरण खींचड़, न्यूरो फिजिशियन, डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज
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