रियासतकालीन ड्रेनेज सिस्टम बदहाल, नए पर जोधपुर नगर निगम खर्च करने जा रहा है 35 करोड़ रुपए

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अविनाश केवलिया/जोधपुर. कई वर्षों से मानसून सीजन में हमारे शहर की सबसे बड़ी समस्या वर्षा जल भराव की है। पिछले कुछ सालों के विकट हालात से सबक लेते हुए नगर निगम ने सर्वाधिक जल भराव वाले 38 पॉइंट को टारगेट करते हुए नया डे्रनेज सिस्टम विकसित करने का बीड़ा उठाया है। इसके लिए टैंडर हो चुके हैं। लेकिन प्राचीन शहर के रियासतकालीन ड्रेनेज सिस्टम को अब भी उपेक्षित छोड़ दिया गया है। सरकारी विभाग और निगम के अधिकारी इस पर भी ध्यान दें तो स्थितियां सुधर सकती है। वर्षों पुराने ड्रेनेज सिस्टम पर विशेष रिपोट...

शहर के कई बड़े और छोटे जलाशय रियासतकाल से आपस में जुड़े हुए हैं। यह नहरी सिस्टम काफी सुदृढ़ था। मंडोर से लेकर कायलाना और उम्मेद सागर जैसे बड़े जलाशय भी नहरी सिस्टम से जुड़े थे। गुलाब सागर, फतह सागर के साथ कई बावडिय़ों तक पानी लाने का सिस्टम है। लेकिन समय के साथ या तो इन्हें बंद कर दिया या फिर इस पर अतिक्रमण हो गए। अब शहर की अधिकांश नहरें खाली रहती हैं और कुछ गंदे पानी के नाले में तब्दील हो गई हैं।

कुछ ऐसे हैं नहरों के हालात

उम्मेद सागर नगर
यह नहर कायलाना से होती हुए उम्मेद सागर की ओर जाती है। ओवरफ्लो पानी के साथ आस-पास का वर्षा जल भी उम्मेद सागर तक पहुंचाती थी। लेकिन अब तक झाडिय़ों और गंदे पानी से अटी पड़ी है। कई सालों से इसकी किसी ने सार संभाल तक नहीं की।

गुलाब सागर नहर
शहर के अधिकांश रिहायशी क्षेत्र से निकलने वाली इन नहर पर कहीं निर्माण सामग्री डालकर तो कहीं कचरा डाल कर पाट दिया गया है। कई जगह तो नहर पर निर्माण भी कर दिए गए हैं। ऐसे में बारिश के दिनों में यहां से पानी भी जलाशयों तक नहीं पहुंचता।

फतेह सागर नहर
कागा के समीप यह नहर पूरी तरह से कचरे से अटी पड़ी है। यह आगे गुलाब सागर और फतेह सागर में विभक्त होती है। लेकिन सालों से इसका उपयोग नहीं हुआ।

किला रोड नहर
किला रोड के समीप यह नहर बारिश का पूरा पानी जलाशयों तक पहुंचाती थी। लेकिन यहां निर्माण सामग्री डाल कर पाट दिया गया है। पहाड़ी क्षेत्र का पूरा पानी जलाशयों में न आकर बह जाता है।

कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं
नया डे्रनेज सिस्टम बनाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से हालही में नगर निगम, जेडीए, पीएचइडी जैसे विभागों को समन्वय कर काम करने को कहा था। लेकिन पुरानी नहरों की जिम्मेदारी तक लेने के लिए कोई विभाग तैयार नहीं है। पीएचइडी, जल संसाधन और नगर निगम किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया है।

बारिश में ऐसे होते हैं हाल
शहर में ऐसे 56 स्पॉट चिह्नित किए गए जो बारिश के दिनों में खतरनाक बन जाते हैं। पानी जमा होने से कई प्रमुख सडक़ों पर यातायात भी प्रभावित होता है। 38 ऐसे पॉइंट हैं जिन पर सकारात्मक काम करना शुरू किया गया है।



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