नंदकिशोर सारस्वत/जोधपुर. भोगिशैल पहाडिय़ों में स्थित 900 साल प्राचीन बैद्यनाथ महादेव मंदिर जीर्णोद्धार के बाद इस बार महाशिवरात्रि को भक्तों के लिए खुलेगा। भक्त बैद्यनाथ महादेव के नए शृंगार के साथ दर्शन कर सकेंगे। शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर पालड़ी दईजर स्थित प्राचीन बैद्यनाथ शिव मंदिर जोधपुर नगर की स्थापना से 334 साल पूर्व का है। बैद्यनाथ मंदिर के महंत कैलाशनाथ ने बताया कि 900 साल पहले मारवाड़ की राजधानी रहे मंडोर में सरदार नाहरसिंह पडि़हार का शासन था। मंदिर गर्भगृह, मंदिर सभागार में फ्लोरिंग और प्राचीन साल की मरम्मत का कार्य अंतिम चरण में है। मंदिर आने वाले दर्शनार्थियों के लिए निकासी के दो द्वार हैं।
900 साल प्राचीन है शिवालय
बैद्यनाथ मंदिर की स्थापना के बारे में कहा जाता है कि मारवाड़ रियासत काल के मंडोर के सरदार नाहरसिंह शिव के परम भक्त थे। एक बार उनके पुत्र की तबीयत खराब होने के दौरान राज चिकित्सक भी उपचार के लिए कहीं बाहर प्रवास पर थे। चिंतित मुद्रा में बैठे सरदार नाहर सिंह के पास उस समय एक सैनिक घुड़सवार सूचना लाया की पहाड़ी पर पेड़ के नीचे कोई बुजुर्ग वैद्य बैठे हैं। सरदार नाहरसिंह ने वैद्यजी को बुलाने में समय व्यर्थ गंवाने के बजाए अपने पुत्र को रथ में बैठाकर वैद्य के पास निकल पड़े और उपचार शुरू करवाया।
कुछ ही देर में उनके पुत्र को आराम मिला। उन्होंने वैद्यराज को प्रणाम कर अपने साथ मंडोर चलने को कहा। लेकिन वहां से वे अंतध्र्यान हो गए। सरदार की समझ में आ गया कि साक्षात महादेव वैद्यराज बनकर यहां प्रकट हुए थे। इस घटना के बाद नाहरसिंह ने उसी जगह पर एक मंदिर विक्रम संवत 1176 में भाद्र मास की पूर्णिमा के दिन प्रतिष्ठित किया। जिसे बैद्यनाथ मंदिर कहा जाने लगा।
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