महाशिवरात्रि को 29 साल बाद महायोग की त्रिवेणी, राशि अनुसार शिव आराधना से होगा लाभ

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जोधपुर. देवों के देव महादेव की आराधना का पर्व महाशिवरात्रि 21 फरवरी को मनाया जाएगा। इस बार महाशिवरात्रि को 29 साल बाद महायोग की त्रिवेणी होगी। शशि, सुस्थिर और सर्वार्थ सिद्धि योग में शिवरात्रि महापर्व मनाया जाएगा। सूर्यनगरी के प्रमुख ज्योतिषियों के अनुसार महाशिवरात्रि को 29 साल बाद शशि योग बनेगा। इसकी वजह यह है कि शनि 29 साल बाद अपनी राशि मकर में और गुरु भी अपनी राशि धनु में स्थित है। यह योग चन्द्र से शनि के प्रथम, चतुर्थ, सप्तम या दसवे स्थान पर होने पर यह योग बनता है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि व सुस्थिर योग भी रहेगा। श्रवण नक्षत्र और चतुर्दशी के एक साथ होने से यह योग बनते है। ये दोनों योग भी शुभ माने गए हैं। महाशिवरात्रि को शहर के विभिन्न शिवालयों में दिन भर अभिषेक व कीर्तन का क्रम रहेगा।

पंच महापुरुष योग भी
सूर्यनगरी के ज्योतिषियों के अनुसार इस बार महाशिवरात्रि को चन्द्र शनि की मकर में युति के साथ पंच महापुरुष योग भी बना है। इसे ही शशि योग भी कहते हैं। श्रवण नक्षत्र में आने वाली शिवरात्रि और मकर राशि के चन्द्रमा का योग बनती है। यह संयोग शनि के मकर राशि में होने से और चन्द्र का गोचर क्रम में शनि के अधिपत्य वाली मकर राशि में होने से शशि का संयोग बन रहा है। महाशिवरात्रि को सुबह 9.12 बजे से दूसरे दिन 22 फरवरी को सुबह 11.18 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। इस दिन रात्रि के चारों प्रहर में शिव पूजा करने से लाभ होगा। इस दिन शिव आराधना से चन्द्रमा, बृहस्पति और शनि दोष और प्रतिकूल प्रभाव कम होगा।

राशि अनुसार उपाय
महाशिवरात्रि को मेष, वृषभ व मिथुन राशि वालों को रुद्रष्टध्यायी, कर्क, सिंह व कन्या राशि वालों को शिव तांडव स्त्रोत, तुला, वृश्चिक व धनु राशि वालों को शिव महिम्न स्रोत, मकर राशि वालों को शिव चन्द्रशेखर स्त्रोत, कुंभ राशि वालों को शिव पंचाक्षर व मीन राशि वालों को महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से लाभ होगा।

नए कार्यों के लिए शुभ योग
जोधपुर के ज्योतिषियों के अनुसार 21 फ रवरी की शाम 5.22 बजे तक त्रयोदशी तिथि शुरू हो जाएगी। इस बार 117 साल बाद शिवरात्रि को शनि और शुक्र का दुर्लभ योग बन रहा है। शनि अपनी स्वयं की राशि मकर में और शुक्र अपनी उच्च राशि मीन में रहेगा। इससे पहले ऐसा योग 25 फ रवरी 1903 को बना था। गुरु भी अपनी स्वराशि धनु में स्थित है। इस योग में शिव पूजा करने पर शनि, गुरु व शुक्र के दोषों से मुक्ति मिल सकती है।

नए कार्यो की शुरूआत करने के लिए ये योग बहुत ही शुभ माना गया है। शिवरात्रि पर शनि के साथ चंद्र भी रहेगा। शनि-चंद्र की युति की वजह से विष योग बन रहा है। इस योग में शनि और चंद्र के लिए विशेष पूजा करनी चाहिए। कुंडली में शनि और चंद्र के दोष दूर करने के लिए शिव पूजन लाभकारी बताया गया है। बुध और सूर्य कुंभ राशि में एक साथ रहेंगे, इस वजह से बुध- आदित्य योग बनेगा।



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