- अरविन्द सिंह राजपुरोहित
जोधपुर। किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले एक युवक की मां को कैंसर हुआ। चिकित्सकों से जांच में पता चला कि लगातार रासायनिक खेती से उत्पन्न अन्न खाने के चलते यह बीमारी हुई। बस यहीं से मन में ठान लिया कि जहरीली खेती से हो रहे नुकसान से लोगों को बचाना है। इसी उद्देश्य ने एक ऐसे स्टार्टअप को जन्म दे दिया जिसका कभी सपने में भी नहीं सोचा था। कुछ ऐसी ही कहानी है जोधपुर में रह रहे किसान परिवार के दो दोस्तों राणुसिंह चाड़वास व दीपकसिंह आउआ की। जिन्होंने रासायनिक खेती से होने वाले नुकसान को देखते हुए जैविक खेती ( Organic Farming ) को लेकर ऐसा स्टार्टअप खड़ा किया जो औरों के लिए प्रेरणा बन रहा है। दोनों वर्तमान में बिना किसी केमिकल प्रयोग से जैविक खेती से फसल उगाकर लोगों के घरों तक स्वस्थ अन्न पहुंचाने की दिशा में काम कर रहे हैं। खास बात यह है कि इस काम को शुरु करने के लिए दोनों ने अच्छे पैकेज की जॉब छोडकऱ खेती की ओर रुख किया।
मंडी से अधिक दाम में खरीदते थे फसल
दोनों ने काजरी वैज्ञानिकों के साथ मिलकर गांव-गांव जाकर किसानों को जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित किया। जिले के जैविक खेती करने वाले किसानों की सूची बना उन्हें अपनी टीम में जोड़ा। प्रोत्साहन के लिए ऐसे किसानों से मंडी दर से 15 से 20 प्रतिशत अधिक दामों में फसल खरीदी। वर्तमान में दो हजार से अधिक परिवार इनके बनाए जैविक प्रोडक्ट यूज कर रहे हैं।
महज 10 हजार से की शुरुआत
दीपकसिंह ने बताया कि जैविक खेती के फायदे जानने के लिए उन्होंने लगभग डेढ वर्ष तक रिसर्च की। जिलों में अलग-अलग गांवों, अस्पतालों में कैंसर पीडि़त उन मरीजों से मिले, जिन्हें रासायनिक खेती वाले धान के सेवन से कैंसर हुआ है। इसके बाद जब स्टार्टअप शुरू करने की बारी आई तो महज 10 हजार रुपए थे। इसी से सेवड़ ऑर्गेनिक नाम से खुद के खेत में मूंग उगाकर शुरुआत की। लोगों को जागरुक किया। आज सालाना 20 से 25 लाख रुपए का टर्नओवर मिलकर कर रहे हैं।
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