जोधपुर.
शहर के सार्वजनिक और सामुदायिक शौचालय गूगल पर लिस्टेड हो चुके हैं। हम एक क्लिक पर इन्हें खोज सकते हैं। लेकिन इनकी बदहाली स्वच्छता सर्वेक्षण में किरकिरी कर सकती है। स्वच्छता सर्वेक्षण में इन शौचालयों की बेहतर स्थिति पर 270 और स्वच्छता सर्वेक्षण के स्लोगन लिखे होने पर 125 अंक मिलते हैं। डायरेक्ट ऑब्जर्वेशन में इनका निरीक्षण होगा, ऐसे में पत्रिका टीम ने देखे ऐसे ही सार्वजनिक शौचालयों के हाल।
- सार्वजनिक और कम्युनिटी टॉयलेट की सफाई पर अधिकतम 270 अंक।
- सार्वजनिक शौचालयों पर स्वच्छता स्लोगन लिखे होने पर अधिकतम 125 अंक।
स्पॉट 1
प्रताप नगर बस स्टैंड पर बने सार्वजनिक टॉयलेट की स्थिति तो अच्छी थी, लेकिन यहां स्वच्छ भारत मिशन के स्लोगन नहीं मिले। पानी की टंकियां लगी हैं, लेकिन सभी सेनेट्री उपकरण सभी टूटे हुए हैं।
स्पॉट 2
विद्याशाला रोड पर शौचालय। स्वच्छ भारत मिशन का स्लोगन तो है। लेकिन सफाई के मामले में हालात काफी बुरे। दुर्गंध से स्थितियां अमानवीय हो रही है।
स्पॉट 3
रेलवे स्टेशन रोड। यहां सार्वजनिक शौचालय ठेका पद्धति पर संचालित। पानी व अन्य सुविधाएं तो ठीक। लेकिन सफाई बदहाल स्थिति में। स्वच्छता के स्लोगन भी पूरी तरह से नदारद।

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