जोधपुर.
रेलवे कर्मचारियों ने विभाग से मिले सरकारी आवासों को कमाई का जरिया बना दिया है। कई कर्मचारियों ने सरकारी क्वार्टर को किराए पर चढ़ा मोटी राशि कमा रहे हैं। पिछले दिनों इसकी शिकायतें रेलवे बोर्ड तक पहुंची तो अब सख्ती बरती जा रही है। कितने लोग अवैध रूप से किराये पर क्वार्टर चढ़ाकर बैठे हैं और कितने इस वजह से सुविधाओं से वंचित है। रेलवे बोर्ड ने मण्डल रेल प्रबंधक (डीआरएम) से इसकी रिपोर्ट मांगी है।
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सभी डीआरएम को सख्त कार्यवाही के निर्देश
रेलवे क्वार्टर किराए पर देने वाले कर्मचारियों की अब खैर नहीं है। रेल मंत्रालय ने सभी मंडल के डीआरएम को निर्देश जारी कर कहा है कि रेलवे आवास को अन्य को किराए पर देने वाले कर्मचारियों के खिलाफ डीआरएम सख्त कार्रवाई करे। रेलवे बोर्ड के डायरेक्टर ईस्ट जी अनिल गौतम ने आदेशी जारी कर कहा कि रेलवे बोर्ड के ध्यान में आया है कि रेलवे कर्मचारी अपने आवास अलॉट तो करवा देते हैं लेकिन वह आउटसाइडर (रेलवे विभाग के अलावा अन्य लोगों ) को किराए पर दे देते है। इससे जिन कर्मचारियों को रेलवे आवास की जरूरत होती है, वे आवास से वंचित रह जाते है और उन लोगों को मुंह मांगे किराए पर मकान में रहना पड़ता है।
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17 फरवरी तक रिपोर्ट मांगी
रेलवे बोर्ड ने सभी डीआरएम को सरकारी आवास को किराए पर देने वाले कर्मचारियों को चिन्हित करने के आदेश दिए। साथ ही, रेलवे आवास किराए पर देने वाले कर्मचारियों के खिलाफ डी एण्ड आर के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए। रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में सभी डीआरएम से रेलवे आवास की 17 फ रवरी तक रिपोर्ट मांगी है।
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