कभी यहां आवाज गूंजा करती थी क से कबूतर, ख से खरगोश...

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बिलाड़ा (जोधपुर). कभी इन स्कूलों में क से कबूतर व ख से खरगोश की आवाज गूंजा करती थी, अब यहां ऐसी कोई भी आवाज नहीं आती है। कम नामांकन व एक किलोमीटर की दूरी पर दूसरे विद्यालय होने के कारण ये बंद हो गए हैं। अब ये विद्यालय सुनसान पड़े हैं।


इन विद्यालयों में जो अध्यापक कार्यरत थे ,उन्हें दूसरे विद्यालय में भेज दिया गया। वहीं इन विद्यालयों को दूसरे विद्यालय में मर्ज कर दिया गया। तब से वीरान पड़े इन विद्यालय भवनों की कोई सुध नहीं ले रहा है, परिणामस्वरूप अब ये भवन समाजकंटकों के अड्डे बन गए तो किसी ने इन भवनों के दरवाजे-ताले तोड़ दिए।


सरकारी भवन हो रहे दुर्दशा के शिकार


ब्लॉक के 35 विद्यालय ऐसे हैं जो मर्ज हो गए हैं। अब यह विद्यालय बंद हैं और कुछ विद्यालय तो जर्जर अवस्था में हो गए हैं। इनके रखरखाव के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। बंद पड़े इन विद्यालयों के आसपास रहने वाले को भी चोरियों का डर लगा रहता है। वहीं सरकार के करोड़ों रुपए से बने भवन आज सुनसान हैं।


यह पड़े हैं बंद


ब्लॉक के विद्यालयों में बिलाड़ा नगरपालिका की राप्रावि. देवनगरी, राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय उचियाडा, राजकीय प्राथमिक विद्यालय पतालियावास, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय सोजती गेट, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय नाथद्वारा, राजकीय प्राथमिक विद्यालय बाणगंगा, देवकी राजकीय प्राथमिक विद्यालय, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय जंक्शन फाटक। इसी प्रकार बाला, हरियाड़ा, कापरड़ा, मालियों की ढाणी खेजड़ला, बरना, जटियों का बास हरियाड़ा, झाक, कालाउना, सीरवियो चौकीदारो की ढाणी कालाउना, मालकोसनी, ओलवी, भीलों की ढाणी ओलवी, पड़ासला कलां, पटेल नगर, जोगेश्वर थान रामासनी, रणसीगाव, सम्भाडिय़ा, उदलियावास, खेजड़ला, रणसीगाव, लाम्बा, बीरावास, खोजों की ढाणी झाक, तेजाबा की ढाणी बीरावास, नवादिया बेरा बरना, उदलियावास, पोटलियों की ढाणी बाला यह विद्यालय बंद हैं और भवन जर्जर हो रहे हैं। निप्र


इन्होंने कहा


कम नामांकन व एक किलोमीटर की दूरी में दो स्कूल हो जाने के कारण इन स्कूलों को दूसरी स्कूलों में मर्ज कर दिया गया।


-कानाराम हिमार, बीईईओ शिक्षा विभाग बिलाड़ा।



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