विकास चौधरी/जोधपुर. स्मैक का नशा न सिर्फ शारीरिक और मानसिक तौर पर कमजोर करता है, बल्कि आर्थिक तौर पर भी तोड़ देता है। स्मैक की तलब पूरी करने के लिए एक नशेड़ी को हर दिन कम से कम एक से दो हजार रुपए की आवश्यकता होती है। इसके लिए वह सबसे पहले अपने ही घर से रुपए व अन्य सामान चुराता है। घरवालों की सख्ती शुरू होने पर वह बाहर चोरी और लूटपाट शुरू कर देता है। यहीं से वह अपराध की दुनिया की तरफ बढऩे लग जाता है।
पुलिस कमिश्नरेट में दुपहिया वाहन चोरी, चेन, मोबाइल व बैग लूट की अधिकांश वारदातों के पीछे स्मैक का नशा सबसे बड़ा कारण है। स्मैक की एक पुडिय़ा का नशा दस से बारह घंटे रहता है। इसके बाद नशेड़ी को फिर तलब होती है। उसे हर हाल में स्मैक की जरूरत होती है। इसके लिए वह दुपहिया वाहन चोरी या महिलाओं से चेन या बैग लूटना शुरू कर देता है। चोरी की बाइक वह सिर्फ दो से तीन हजार रुपए या स्मैक की एक पुडिय़ा के बदले बेचने को तैयार हो जाता है।
स्मैक से इस तरह होते हैं अपराध
1. स्मैक के नशे में दिनदहाड़े मकानों में चोरी
हड्डी मिल निवासी अजय उर्फ ठाकरिया शातिर नकबजन और बासनी थाने का हिस्ट्रीशीटर है। पुलिस के अनुसार स्मैक के नशे में वह दिनदहाड़े मकानों के ताले तोडकऱ चोरी करता है। वह तीन-चार माह पूर्व सरदारपुरा ए व डेढ़ माह पूर्व डी रोड पर दो सूने मकानों से लाखों रुपए का सामान चोरी के मामले में गिरफ्तार हुआ था।
2. स्मैक के लिए ही लूटते हैं सोने की चेन
सरदारपुरा में सी रोड पर ज्यूस की दुकान के पास महिला के गले से सोने की चेन लूट का आरोपी, चिल्ड्रन पार्क के पास जिम के सामने एक युवती के गले से चेन लूटने के आरोपी भी स्मैक के आदी थे।
3. बाइक को टक्कर के बहाने वसूली
चौहाबो थाना क्षेत्र का एक बदमाश ने स्मैक की तलब पूरी करने के लिए नया तरीका अपनाया है। वह क्षतिग्रस्त मोटरसाइकिल पास रखता है। इसी बाइक को आगे लाकर किसी चार पहिया वाहन को रोकता है। कार से टक्कर मारने की बात पर विवाद खड़ा करता है और क्षतिपूर्ति के नाम पर रुपए वसूल कर लेता है।
4. मुंह से निकलते हैं झाग, हवालात में फोड़ते हैं सिर
पुलिस किसी स्मैक के आदी को पकडकऱ थाने लाती है तो हर समय जान सांसत में रहती है। स्मैक का नशा उतरते ही स्मैकची की हालत खराब होने लग जाती है। उसके मुंह से झाग निकलने लग जाते हैं। नशे की पूर्ति न होने पर उसे ताण मिरगी जैसे दौरे तक आ जाते हैं। वह हवालात की दीवार या सलाखों से सिर तक फोडऩे लग जाते हैं। यह देख पुलिस के भी हाथ-पांव फूलने लग जाते हैं। यदि पुलिस को और पूछताछ करनी होती है तो उसे किसी चिकित्सक के पास ले जाकर इलाज तक कराती है। कई बार स्मैक देकर तलब पूरी भी करनी पड़ती है।
5. हवालात में थाली से काटा था हाथ
लूट के एक मामले में सरदारपुरा थाना पुलिस ने स्मैक के आदी एक युवक को गिरफ्तार कर हवालात में डाला था। पुलिस ने थाली में खाना परोसकर हवालात में युवक को दिया। स्मैक की तलब होने से झटपटा रहे युवक ने थाने से ही हाथ पर कट लगा लिया था। पुलिस ने देखा तो तुरत-फुरत में प्राथमिक उपचार कराया गया था।
पूछताछ में आती है दिक्कत
‘किसी भी वारदात में स्मैक के आदी व्यक्ति को पकडकऱ थाने लाने व जांच करने में बहुत दिक्कत और परेशानी होती है। स्मैक न मिलने पर उसकी हालत खराब हो जाती है। मिरगी जैसे दौरे आने लग जाते हैं। ऐसी स्थिति में पुलिस को उसे जल्द से जल्द कोर्ट में पेश करना पड़ता है।’
- प्रीति चन्द्रा, पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) जोधपुर
स्मैक के लिए अधिकांश वारदातें
बाइक चोरी व लूट
वर्ष............. दुपहिया वाहन चोरी......चार पहिया वाहन चोरी..............लूट
2016...........615.............................109...........................................66
2017...........669.............................134...........................................65
2018...........829.............................099...........................................57
(नोट : वर्ष 2019 में कमिश्नरेट के पश्चिमी जिले में 801 दुपहिया, 83 चार पहिया वाहन चोरी व लूट के 60 मामले दर्ज हुए हैं। पूर्वी जिले में अक्टूबर तक 485 वाहन चोरी, 32 चार पहिया वाहन चोरी और लूट के 27 मामले दर्ज हुए।)
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