गजेन्द्र सिंह दहिया/जोधपुर. भारतीय सेना में मेजर श्याम कृष्णन की टीम ने लेह व कारगिल जैसे दुर्गम स्थानों पर तैनात सैनिकों के लिए मेडिकल ग्लव्स तैयार किए हैं जो सैनिकों की चिकित्सकीय रिपोर्ट के साथ उनकी रियल टाइम पोजीशन मिनट दर मिनट बेस कैंप भेजेंगे। ग्लव्स पहनने के बाद सैनिकों की पूरी जानकारी बेस कैंप को निरंतर मिलती रहेगी और इमरजेंसी में तुरंत सहायता मुहैया करवाई जा सकेगी।
मेजर श्याम जोधपुर के दामाद हैं। वे वर्तमान में आर्मी की सिग्नल यूनिट में लेह में तैनात हैं। दो दिन पहले ही सेना दिवस के मौके पर दिल्ली में आर्मी की ओर से लगाई प्रदर्शनी में उन्होंने इन ग्लव्स का प्रदर्शन किया। प्रदर्शनी का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और आर्मी चीफ मनोज मुकुंद नरवणे ने निरीक्षण किया। प्रधानमंत्री मोदी को ग्लव्स बहुत पसंद आए और उन्होंने मेजर सहित पूरी टीम की प्रशंसा की। सैनिकों के लिए बेहतर शोध करने पर प्रधानमंत्री मोदी ने मेजर श्याम को सर्टिफिकेट ऑफ एक्सीलेंस प्रदान किया गया।
कैसे काम करता है ग्लव्स
ग्लव्स के अंदर सेंसर्स लगे हुए हैं जो व्यक्ति का ऑक्सीजन लेवल, हार्ट रेट, तापमान व बेसकैंप से दूरी और रियल टाइम लोकेशन की जानकारी भेजते हैं। सेंसर से सूचनाएं भेजने के लिए इंटरनेट की बजाय रेडिया फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल किया गया है। ग्लव्स से सूचनाएं एक रिसीवर को मिलती हैं जो बेस कैंप पर रखा होता है। रिसीवर का संबंध एक मोबाइल से ब्लूटूथ के जरिए रहता है। इसके लिए मेजर की टीम ने एक विशेष एंड्रोइड ऐप भी तैयार किया है जो सेंसर्स की रीडिंग को टीवी की तरह मोबाइल की स्क्रीन पर डिस्प्ले करता है। यह सैनिकों के डाटा में उतार-चढ़ाव होने पर इमरजेंसी सिग्नल भी देता है। साथ ही प्रत्येक सैनिक के मेडिकल डाटा का ग्राफिकल एनालिसिस भी मुहैया करवाता है। जिससे बेस कैंप पर मौजूद अधिकारियों को संबंधित सैनिक के स्वास्थ्य के बारे में पूरी जानकारी रहती है।
डॉ गट्टानी के हैं दामाद
मेजर श्याम कृष्णन की शादी जोधपुर के डॉ प्रदीप गट्टाणी की बेटी डॉ गौरी के साथ हुई है। डॉ. प्रदीप सांसद व स्वतंत्रता सेनानी रणछोड़दास गट्टाणी के पुत्र हैं। मेजर श्याम मूलत: केरल के पटनमटिड्डा के निवासी है।
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