परियोजना निदेशक मुरारीलाल थानवी ने विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों को सम्बोधित करते हुए कहा कि हमें अपने जीवन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपनाना चाहिए व अधिक से अधिक प्रश्न करने चाहिए। समन्वयक प्रीति राठौड़ ने ग्रामीणों का आभार व्यक्त किया। मेले में विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए राजकीय उच्च प्राथमिक संस्कृत विद्यालय के प्रधानाध्यापक डूंगरसिंह राजपुरोहित ने कहा कि इस गांव में पहली बार इस तरह के विज्ञान मेले का आयोजन हुआ है। इससे गांव के युवाओं का वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित होगा। अंजू माली ने कहा कि विज्ञान मेले में प्रदर्शित मॉडल्स विज्ञान के सिद्धान्तों को समझने के लिए बहुत उपयोगी है।
विज्ञान मेले में रेल क्रॉसिंग पॉईन्ट, अनन्त प्रतिबिम्ब के सिद्धान्त पर आधारित कुएं का मॉडल, सोलर कुकर, उत्तल व अवतल दर्पण, क्लच सिस्टम, जेसीबी मॉडल, वायुदाब के सिद्धान्त पर आधारित रॉकेट आदि मॉडल्स प्रदर्शित किये गए। मेले में मोतीराम ने इन मॉडल्स की कार्यप्रणाली एवं वैज्ञानिक सिद्धान्तों के बारे में विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों को जानकारी दी। विद्यार्थी मेले में मॉडल को देखकर रोमांचित हो उठे। गांवों में फैले अंधविश्वासों को कम करने के उद्देश्य से महेश पुरोहित ने आग खाना, पानी से आग लगाना, बिना माचिस के आग लगाना आदि चमत्कार दिखाते हुए उनके वैज्ञानिक कारण भी स्पष्ट किये। जिससे ग्रामीणों को समझ आया कि यह कोई चमत्कार नहीं बल्कि विज्ञान है।
विज्ञान मेले में विज्ञान मॉडल्स के साथ रोचक स्टॉल्स भी लगाई गई। जिसमें छूकर बताओ, गिलास गिराओ ईनाम पाओ, जरा सम्भल कर चल, रिंग फेंको ईनाम जीतो, ओरिगेमी आदि शामिल है। मेले में खेल प्रतियोगिता के अन्तर्गत चम्मच दौड़ का आयोजन किया गया। जिसमें प्रथम स्थान पर खूशबू, द्वितीय स्थान पर नेहा व तृतीय स्थान पर रामप्यारी रही।
विज्ञान मेले में शिक्षक सत्यनारायण मीणा, चेतन प्रकाश, प्रेमाराम व दूसरा दशक कार्यकर्ता इकबाल मेहर, भंवरलाल, लीला, शैलजा व्यास, पार्थ राठौड़, ज्योति सोनी, पूजा ओड तथा युवा साथी रिंकू, प्रियंका, ताराराम, पूजा माली, हीराराम ने सहयोग किया। (कासं)
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