चित्तौडगढ़़ में भूखंडों की नीलामी में उच्चतम बोली के बावजूद कोर्ट ने लगाई रोक, बताया पारदर्शिता का अभाव

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जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने चित्तौडग़ढ़ के श्यामाप्रसाद मुखर्जी नगर में भूखंडों की नीलामी में नगर परिषद के विराधाभासी रवैये को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने संबंधित पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब तलब करने के साथ ही उच्चतम बोली के बावजूद एक भूखंड की नए सिरे से नीलामी करने पर रोक लगा दी।

न्यायाधीश दिनेश मेहता की एकलपीठ में शफीक इकबाल शेख की ओर से अधिवक्ता संजीत पुरोहित ने बताया कि नगर परिषद चित्तौडगढ़़ की ओर से श्यामाप्रसाद मुखर्जी नगर में भूखंडों की नीलामी प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है। उन्होंने कहा कि परिषद ने भूखंड संख्या 50 से 53 के लिए अपेक्षाकृत न्यूनतम बोली के बावजूद नीलामी को स्वीकृति देते हुए बकाया राशि जमा करवाने के आदेश जारी कर दिए हैं।

जबकि इसके विपरीत एक भूखंड संख्या 49 के लिए उच्चतम बोली के बावजूद परिषद उसे स्वीकार करने की जगह नए सिरे से नीलामी करवाने जा रही है। उन्होंने कहा कि नगर परिषद की भूमिका पर इसलिए भी सवाल खड़े होते हैं,क्योंकि एक ही कॉलोनी के भूखंडों की नीलामी में अलग-अलग मापदंड रखे जा रहे हैं। कोर्ट ने संबंधित पक्षकारों को नोटिस जारी कर नए सिरे से भूखंड की नीलामी को रोक दिया है।

श्रमिक की मौत पर मांगा डेढ़ करोड़ का मुआवजा, सरकार को नोटिस जारी
बासनी में संजय कॉलोनी स्थित सरकारी स्कूल का भवन गिरने से एक श्रमिक की मौत के मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश संख्या तीन ने जिला कलक्टर, राज्य सरकार और अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 6 फरवरी को होगी। मृतक श्रवण सोलंकी की पत्नी किस्तूरी के अधिवक्ता प्रवीणदयाल दवे ने बताया कि प्रकरण में जिला कलक्टर, राज्य सरकार, निदेशक समग्र शिक्षा अभियान, जिला परियोजना समन्वयक, डीपीसी, एईएन, जेईएन, जिला शिक्षा अधिकारी और प्रधानाध्यापक के विरुद्ध घातक दुर्घटना दावा अधिनियम के तहत डेढ़ करोड़ रुपए का दावा प्रस्तुत किया।

गौरतलब है कि गत वर्ष राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक वि़द्यालय संजय कॉलोनी के भवन का पुनर्निर्माण करवाया जा रहा था इस दौरान लापरवाही के चलते निर्माणाधीन भवन गिर गया और श्रमिक श्रवण सोलंकी की मलबे में दबने मृत्यु हो गई। जिला कलक्टर, राज्य सरकार और संबंधित विभाग द्वारा श्रमिक के परिवार को कोई आर्थिक सहायता नहीं दी गई। इस पर उसके आश्रितों ने न्याय के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटा कर मुआवजे की मांग की है।



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