जोधपुर. ये मेरा प्रेम पत्र पढ़कर कि तुम नाराज...चिट्ठी न कोई संदेश...। रवीन्द्रनाथ टैगोर का नाटक द पोस्ट ऑफिस हो या फिर इविस प्रेसले का गीत रिटर्न टू सेंड, कालिदास का मेघदूतम सहित कई अन्य रचनाएं पत्रों की महिमा का बखान खूब करती हैं। अफसोस, अब धीरे-धीरे पत्र लेखन बीते जमाने की बात हो रही है। पहले पत्र लिखने वाला और पाने वाला, भावनाओं के अलग ही संसार में रहते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। मोबाइल के आगमन ने सोशल मीडिया के जरिए संदेश भेजने का तरीका ही बदल दिया है। चंद इमोजी से ही अब भावनाएं व्यक्त की जाने लगी है।
अब नहीं है वो फिलिंग्स
यदि आप किसी को अपनी फिलिंग्स समझाना चाहते हैं तो पत्र से बेहतर इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता। क्योंकि फिलिंग्स को लिखकर ही बेहतर तरीके से समझाया जा सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि लिखने के दौरान हम अपनी सारी भावनाओं को पूरी तरह से व्यक्त कर सकते हैं। वो भी मीठे शब्दों के साथ।
शब्द कभी मरते नहीं
कहा भी गया है कि सौ बार बोलने से ज्यादा एक बार लिखना महत्वपूर्ण हैं। यदि आप पत्र लिखकर किसी के समक्ष अपनी भावनाओं को शेयर कर रहे हैं तो यह वर्षों तक उन्हें आपके अपनेपन की याद दिलाती रहेगी। लेकिन मोबाइल में पता नहीं कब डिलीट ऑप्शन मैसेज चट कर जाए।
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