थार में हो सकती है कैफीन फ्री कॉफी और ग्रीन टी की खेती

पोस्ट पसंद आये तो लाइक जरुर करे ?


जोधपुर. थार के रेगिस्तान में कैफीन फ्री कॉफी यानी चिकोरी और ग्रीन टी की खेती के लिए प्रयास शुरू हो गए हैं। कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर ने चिकोरी और कैमोमाइल ग्रीन टी के बीज मंगवाकर अपने फील्ड में रोपा है। मार्च-अप्रैल में बेहतर फसल होने पर स्थानीय स्तर पर बीज तैयार कर किसानों को दिए जाएंगे। प्रदेश में कॉफी व ग्रीन टी की संभवत: यह पहली खेती होगी। इससे किसानों को नई फसलें मिलेगी और वे आर्थिक रूप से मजबूत होंगे। लोगों को भी स्वास्थ्यवद्र्धक पेय पदार्थ उपलब्ध हो सकेगा।

ऑर्गेनिक इंडिया की ओर से कृषि विवि को बीज की आपूर्ति की गई है। चिकोरी व ग्रीन टी दोनों ही शीत ऋतु की फसलें हैं। कुछ समय से चिकोरी से बनने वाले पेय को कॉफी के विकल्प के तौर पर पसंद किया जा रहा है। वर्तमान में कॉफी हाउस में कॉफी के साथ चिकोरी भी मिलाई जाती है। कॉफी पौधे के बीज से प्राप्त किया जाता है जबकि चिकोरी पौधे की जड़ों को भूनकर पेय पदार्थ बनाया जाता है। इसमें कैफीन नहीं है। यह स्वास्थ्य वद्र्धक है। इसमें पौटेशियम की मात्रा अधिक होने से बीपी के मरीजों के लिए अत्यंत लाभदायक है।

फूलों से बनती है हल्की मीठी ग्रीन टी
कैमोमाइल भी एक विशेष पौधा है। इसका पेय ग्रीन या हर्बल टी कहलाता है। कैमोमाइल मूला: जड़ी बूटी है जो फूल से प्राप्त होती है। कैमोमाइल चाय बनाने के लिए पहले फूलों को सुखाकर गर्म पानी में इन्फ्यूज किया जाता है। इसके सेवन से कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को दूर करने में मदद मिलती है। कैमोमाइल टी में कैफीन नहीं होता है। इसका फ्लेवर हल्का मीठा होता है। कैमोमाइल टी में एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी इनफ्लेमेटरी व फ्लेवेनोड्स गुण होते हैं जो शरीर को बीमारियों से बचाते हैं। यह दिल और शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करती है।

‘हमनें चिकोरी और कैमोमाइल की खेती शुरू की है। शोध के बाद मारवाड़ के किसानों को नई खेती की सौगात मिलेगी।’
- डॉ. बीआर चौधरी, कुलपति, कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर



from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2Yjn3K1
Share on Google Plus

About Atul

This is a short description in the author block about the author. You edit it by entering text in the "Biographical Info" field in the user admin panel.

0 comments:

Post a Comment