बिलाड़ा : करोड़ों की योजना के बावजूद नहीं हो पा रही पर्याप्त जलापूर्ति

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बिलाड़ा (जोधपुर). माणकलाव दांतीवाड़ा क्षेत्रीय पेयजल योजना पर करोड़ों की राशि खर्च करने के बाद भी निर्धारित योजना के अनुसार गांवों, कस्बों में पर्याप्त जलापूर्ति नहीं हो पा रही है। इस योजना के अनुसार 112 गांव एवं दो नगर पालिका क्षेत्र के लोगों की प्यास बुझाने के लिए 40 एमएलडी पानी मिलना चाहिए जबकि बिना किसी क्लोजऱ के भी 25 एमएलडी पानी ही मिल पा रहा है।

अभी तो और भी कटौती की संभावना


क्षेत्र के गांवों एवं दोनों नगर पालिका क्षेत्रों में जलापूर्ति करने के लिए डिग्गी को हर समय भरा रखना तय हुआ था लेकिन वर्तमान में डिग्गी तीन चौथाई खाली है। प्रोजेक्ट अधिकारी ने बताया कि पंजाब एवं हरियाणा में रबी की सिंचाई पूरी होने के साथ ही नहरों एवं खाळी की साफ सफाई के लिए 70 दिन का क्लोजर रहने वाला है, ऐसे में अभी से ही डिग्गी को पर्याप्त मात्रा में भर देना जरूरी है।


डिग्गी 27 दिनों के लिए

दांतीवाडा में बनाई गई डिग्गी क्लोजर के दौरान 27 दिनों तक पर्याप्त जलापूर्ति करने की सोच कर बनाई गई है जबकि इस बार मार्च में 70 दिनों का क्लोजर आने वाला है । प्रोजेक्ट अधिकारियों को अभी से यह परेशानी सताने लगी है कि रिजर्व के दौरान 27 दिनों में डिग्गी के खाली हो जाने के बाद ग्रामांचल एवं पालिका क्षेत्र में जलापूर्ति कैसे कर पाएंगे। अधिशासी अभियंता एसएन दाधीच का मानना है कि बिलाड़ा क्षेत्र में आपूर्ति के लिए पर्याप्त नलकूप हैं लेकिन पीपाड़ व अन्य दर्जनों गांवों में जलापूर्ति की व्यवस्था करने में जोर आएगा।


विकल्प 14 सौ करोड़ की योजना


वर्ष 2016 से गांव में जलापूर्ति प्रारंभ होने पर यह तय हो गया कि माणकलाव दांतीवाडा पेयजल योजना इन सभी 112 गांव एवं दोनों नगरपालिका क्षेत्रों में जलापूर्ति करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

तब तत्कालीन राज्य सरकार ने 14 सौ करोड़ की मदासर पेयजल योजना की डीपीआर तैयार करवा कर उसे तकनीकी एवं वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी। इसबीच आचार संहिता के चलते कार्य योजना शुरू नहीं हो पाई। वर्तमान गहलोत सरकार इस वैकल्पिक योजना के लिए एशियन बैंक से तथा जापान की जायका एजेंसी से 1456 करोड़ की राशि ऋण के रूप में लेने की तैयारी में है।

फ्लोराइड युक्त पानी


बिलाड़ा नगर पालिका के बाशिंदों को शायद इंदिरा गांधी नहर का मीठा पानी पीना नसीब में नहीं है जबकि मात्र 6 किलोमीटर की दूरी पर पिचियाक में बने विशाल भूतल टैंक में हजारों गैलन पानी भरा रहता है । यहां से मिलने वाले नाम मात्र के पानी में बांध की पाल के पास दशकों से खुदे नलकूपों का फ्लोराइड युक्त पानी मिलाकर ही कस्बे में जलापूर्ति की जा रही है।



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