जोधपुर. समूचे विश्व को प्रेम-दया और करूणा का संदेश देने वाले प्रभु यीशू मसीह के जन्म दिन ‘क्रिसमस’ के उपलक्ष्य में मंगलवार को मध्यरात्रि को सूर्यनगरी के प्रमुख गिरिजाघरों में मध्यरात्रि प्रार्थना (मिड-नाइट सर्विस) का आयोजन किया जाएगा। एसएम चर्च परिसर में पहली बार बेथहेलम गांव में यीशू जन्म और पुनरुत्थान से जुड़ी कुल 10 झांकियां सजाई जाएगी। जोधपुर के 4 कैथोलिक सहित कुल 19 चर्च में प्रभु यीशु मसीह का जन्म दिन ‘क्रिसमस’ 25 दिसम्बर को मनाया जाएगा।
मसीही समाज के घरों में प्रभु यीशु जन्म ‘बड़े दिन’ से जुड़े खुशियों के गीत क्रिसमस कैरोल्स गायन का क्रम सोमवार को भी जारी रहा।यहां होगी मध्यरात्रि आराधनाजेडीए सर्किल के पास स्थित सेंट थेरेसास् कैथोलिक चर्च में फादर क्लेमेंट के सान्निध्य में रात्रि 11 बजे एवं तारघर के पीछे स्थित समरवेल मेमारियल चर्च और आराधनालय की संयुक्त क्रिसमस आराधना (मिड-नाइट सर्विस ) रेव्ह. जितेन्द्रनाथ व रेव्ह क्रूस लॉयल के सान्निध्य में कुड़ी भगतासनी स्थित आराधनालय चर्च में की जाएगी। आराधना में कलिसिया की ओर से प्रभु यीशु जन्म से ओतप्रोत गीत प्रस्तुत किए जाएंगे।
क्राइस्ट चर्च सरदारपुरा में फादर मनीष राव के सान्निध्य में 11 बजे से आराधना होगी। इसी तरह सरदारपुरा ई रोड स्थित सेन्ट्रल मेथोडिस्ट चर्च में फादर विक्रम मसीह के सान्निध्य में रात्रि 11.30 बजे से आराधना होगी। एसएम चर्च के सचिव डेनिस एलेक्जेण्डर ने बताया कि एसएम चर्च में 25 दिसम्बर को सुबह 9 बजे संयुक्त क्रिसमस आराधना की जाएगी।
बंदियों के साथ बांटी क्रिसमस की खुशियां
चर्च के नवीन पॉल ने बताया कि सोमवार को एसएम चर्च के रेव्ह. जितेन्द्रनाथ, रेव्ह क्रूस लॉयल के सान्निध्य में केन्द्रीय कारागृह और महिला बंदीगृह में आयोजित क्रिसमस कार्यक्रम के दौरान चर्च से जुड़े कलिसिया सदस्यों और चर्च वुमन फैलोशिप की ओर से प्रभु यीशु जन्म से जुड़े खुशियों के गीत क्रिसमस कैरोल्स की प्रस्तुति दी गई। धर्मगुरुओं ने प्रभु यीशु के प्रेम और पाप से पश्चाताप का संदेश दिया।
तो इसलिए क्रिसमस पर आते हैं बच्चों के ‘बाबा’, हम सजाते हैं ट्री
क्रिसमस आते ही लोगों के जेहन में क्रिसमस ट्री, रंग-बिरंगी रोशनी और काड्र्स सामने आते हैं। केवल घर ही नहीं गिरिजाघरों को भी करीने से सजाया जाता है। इस खूबसूरत पर्व का बेसब्री से इंतजार बच्चे करते हैं क्योंकि इस दिन उनके सपनों के बाबा यानी सांता क्लॉज जो उनके पास आते हैं। बहुत सारे प्यारे-प्यारे खिलौनों को लेकर। क्या सच में सांता क्लॉज नाम का कोई व्यक्ति होता है, जो बच्चों को प्यारे-प्यारे गिफ्ट देता है। आखिर क्यों सजाते हैं क्रिसमस ट्री...। सोचा कभी, आइए बताते हैं क्रिसमस से जुड़े कुछ रोचक तथ्य :-
यीशू और सांता क्लॉज का रिलेशन
आज से डेढ़ हजार साल पहले जन्मे संत निकोलस को असली संता माना जाता है। हालांकि संत निकोलस और जीसस के जन्म का सीधा संबंध नहीं रहा है फिर भी वर्तमान में क्रिसमस सांता क्लॉज के बिना अधूरा है। संत निकोलस का जन्म तीसरी सदी में जीसस की मौत के 280 साल बाद मायरा में हुआ। वे एक रईस परिवार से थे। उन्होंने बचपन में ही अपने माता-पिता को खो दिया। बचपन से ही उनकी प्रभु यीशू में बहुत आस्था थी। वे बड़े होकर ईसाई धर्म के पादरी और बाद में बिशप बने। उन्हें जरूरतमंदों और बच्चों को गिफ्ट्स देना बहुत अच्छा लगता था।
इसलिए क्रिसमस पर गिफ्ट देने का प्रचलन बन गया। जबकि कुछ लोग कहते हैं सांता क्लॉज भगवान की ओर से भेजा गया दूत है तो कुछ लोगों का मानना है कि ये यीशु के पिता है और इसलिए अपने बेटे के जन्मदिन पर बच्चों को गिफ्ट देने आते हैं। सांता क्लॉज का जो प्रचलित नाम है वह निकोलस के डच नाम सिंटर क्लास से आया है। जीसस और मदर मैरी के बाद संत निकोलस को ही इतना सम्मान मिला है।
क्रिसमस ट्री
क्रिसमस ट्री को रंग-बिरंगी लाइट्स से सजाया जाता है। एक मान्यता के अनुसार क्रिसमस ट्री को सजाने की परम्परा जर्मनी से प्रारम्भ हुई। यहां से 19वीं सदी से यह परम्परा इंग्लैंड में पहुंची, जहां से पूरे विश्व में। वैसे तो इस ट्री की कहानी प्रभु यीशु मसीह के जन्म से है। जब उनका जन्म हुआ तब उनके माता पिता मरियम एवं जोसेफ को बधाई देने वालो ने, जिनमें स्वर्गदूत भी थे, एक सदाबहार फर को सितारों से रोशन किया था। तब से ही क्रिसमस ट्री को मान्यता मिली। इन वृक्षों पर मोमबत्तियों, टॉफियों और बढिय़ा किस्म के केक को रिबन और कागज की पट्टियों से बांधा जाता है। इस ट्री पर छोटी-छोटी मोमबत्तियां लगाने का प्रचलन 17वीं शताब्दी से शुरू हो गया था। प्राचीन काल में क्रिसमस ट्री को जीवन की निरंतरता का प्रतीक माना जाता था। मान्यता थी कि इसे सजाने से घर के बच्चों की आयु लम्बी होती है।
यह भी जानें
- क्रिसमस ईसाई समाज का एक प्रमुख त्योहार है जो 25 दिसंबर को बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है क्योंकि इस दिन ईसा मसीह का जन्म हुआ था। इसे बड़ा त्योहार भी कहते हैं।
- ईसाई समाज के लोग नए वस्त्र पहनते हैं। घरों में केक बनाते हैं या फिर मंगवाते हैं।
- एक दूसरे को बधाई देते हैं। यह पर्व सच्चाई और सद्भावना के मार्ग पर चलने का संदेश देता है।
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