लाइफ सेफ्टी के लिए फॉलो ट्रैफिक रुल्स

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जोधपुर. धीरे चलोगे तो बार-बार मिलोगे, नहीं तो हरिद्वार में मिलेंगे, इससे पहले की शौक न बन जाए शोक, प्लीज फॉलो ट्र्रैफिक रुल्स। इस तरह के कई स्लोग्नस आप बस, ट्रक के पीछे या सरकारी वेबसाइट पर देखते आए हैं। यह सच है। क्योंकि मंजिल तक जाने की जल्दी में लोग न सिर्फ ट्रैफिक रुल्स तोड़ रहे हैं बल्कि सेल्फ सेफ्टी के लिए हैलमेट जैसी इंपोर्टेंस को भी कोई वेल्यू नहीं दे रहे हैं। आपको जानकर हैरानी होगी की ट्रैफिक रुल्स को फॉलो नहीं करने वालों में सबसे ज्यादा संख्या युवाओं की है। यानी शिक्षित एवं देश का भविष्य कहा जाने वाला युवा ही ट्रैफिक रुल्स फॉलो नहीं करता है। यह भी तब जब शासन, प्रशासन से लेकर समाजसेवी संस्थाओं की ओर से भी समय-समय पर जागरुकता अभियान चलाकर आमजन को यातायात नियम के प्रति जागरुक किया जाता है।

शौक बन न जाएं जानलेवा, समझें जिम्मेदारी
शहर में कई एेसे पेरेंट्स हैं जो अपने बच्चों को नाबालिग अवस्था में ही वाहन चलाने के लिए दे देते हैं। आमतौर पर एेसे बच्चे स्कूल, कॉलेज से जुड़े होते हैं। अन्य साथियों पर इंप्रेशन के लिए एेसे स्टूडेंट्स मंहगे वाहनों को तेज रेसिंग से चलाना, रुल्स फॉलो नहीं करने, पुलिस से बच निकलने पर फ्रैंडस के समक्ष शेखी बगारने जैसे शौक रखते हैं। कई बार पकड़े जाने पर पुलिस के समक्ष बहानेबाजी भी करने लगते हैं। जबकि जिम्मेदार पेरेंट्स होने के नाते नाबालिग के हाथों में वाहन की चाबी नहीं देनी चाहिए।

बच्चों को समझाएं
-यदि आपके बच्चे भी ट्रैफिक रुल्स फॉलो नहीं करते हैं तो उन्हें जिम्मेदार पेरेंट्स होने के नाते रुल्स फॉलो करने की नसीहत दें। उन्हें समझाएं की उनकी लाइफ फैमिली, सोसायटी व सेल्फ के लिए कितनी इंपोर्टेंस हैं। हैलमेट की अहमियत क्या है यह उनसे पूछनी चाहिए। जिनके परिवार की सदस्य की हैलमेट के अभाव में, रुल्स फॉलो नहीं करने के चलते जान चली गई हो। इसलिए हमेशा रुल्स फॉलो करने चाहिए।

रोड एक्सीडेंट एक नजर में
यातायात पुलिस के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष- 2017 में जोधपुर जिले में ही 1191 सडक़ हादसे हुए। जिनमें 612 लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा। वहीं 1065 घायल हुए। यह आंकड़े इसलिए भी चौंका सकते हैं, क्योंकि इनमें से कईयों ने रुल्स को फॉलो नहीं किया। जबकि राजस्थान की बात की जाए तो वर्ष 2017 में 22 हजार 112 एक्सीडेंट हुए। जिनमें दस हजार 444 लोग मौत का ग्रास बन गए। वहीं 22 हजार 71 लोगों को अस्पताल में विकट हालात में लाया गया।

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