जोधपुर एम्स: दवाओं का असर नहीं हुआ तो सर्जरी से किया मिर्गी का उपचार

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जोधपुर. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जोधपुर एम्स) के न्यूरो सर्जरी विभाग ने मिर्गी की बीमारी का सर्जरी से सफल इलाज करने का दावा किया है। एम्स के अनुसार दो रोगियों को मिसीअल टेम्पोरलस्कलेरोसिस नामक मिर्गी थी। इनमें से एक जोधपुर का 20 वर्षीय युवक है। सर्जरी के बाद भी रोगी को दवाइयां चालू रहेंगी। रोगी एक से दो साल तक रोगी चिकित्सकों की ऑब्जर्वेशन में रहेगा। चिकित्सकों का मानना है कि रोगी 70 से 80 फीसदी तक नॉर्मल हो जाएंगे।

जोधपुर एम्स में न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. दीपक झा व डॉ. एस भास्कर ने कहा कि सर्जरी द्वारा फोकल कोर्टिकल डिस्प्लेजिया, पेरिनेटल ग्अिओसिस, गैंग्लिओमा व केवर्नोमा बीमारियां का उपचार किया जाता है। एम्स में इस सर्जरी की शुरुआत के लिए त्रिवेंद्रम के चित्रा तिरुनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के सह आचार्य डॉ. जॉर्ज विल्लनीलम को आमंत्रित किया गया। इस ऑपरेशन में न्यूरोलॉजी, एनेस्थेसिया, रेडियोलॉजी डाइग्नोस्टिक व मनोरोग विभाग के चिकित्सकों को सम्मिलित किया गया। एम्स अस्पताल क अधीक्षक डॉ. अरविंद सिन्हा ने बेस्ट परफोर्मेंस देने के लिए पूरी टीम के कार्यों को सराहा।

डॉ. झा व डॉ. भास्कर ने बताया कि मिर्गी तंत्रिका तंत्र संबंधी बीमारी है। जिसमें हल्के और गंभीर दोनों प्रकार के दौरे बार-बार आ सकते हैं। भारत में लगभग 1 हजार में से 6 लोग मिर्गी बीमारी से ग्रसित हैं। इसमें कई 60 से 65 प्रतिशत लोगों का इलाज एक दवा या ज्यादा दवाइयों से किया जा सकता है।

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