जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने सोमवार को राज्य सरकार, जोधपुर विकास प्राधिकरण और नगर निगम को तय समय सीमा में शहर में यातायात प्रबंधन, पार्किंग बहाली और बसों के सुव्यवस्थित संचालन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने जहां सडक़ों और फुटपाथ पर किए गए अतिक्रमणों को लेकर गहरी नाराजगी जाहिर की, वहीं पार्किंग बहाली की उपेक्षा करने पर जिम्मेदारों को स्पष्ट रूप से कोर्ट द्वारा समय-समय पर दिए गए आदेशों की अवमानना का दोषी माना है।
वरिष्ठ न्यायाधीश संगीत लोढ़ा और न्यायाधीश विनीतकुमार माथुर की खंडपीठ ने रवि लोढ़ा की ओर से दायर अवमानना याचिका पर अपने आदेश में कहा कि बहुमंजिला इमारतों में पार्किंग सुनिश्चित करने के मामले में कई बार निर्देश दिए जा चुके हैं।
पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी की पत्र याचिका में भी विस्तृत निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद पार्किंग के अभाव वाली सीज इमारतों को बिना कमी पूर्ति किए सीज मुक्त किया जाता रहा है।
यह जिम्मेदारों की कोर्ट के आदेश की पालना के प्रति जानबूझकर की गई स्पष्ट अवमानना है। उल्लेखनीय है कि कोर्ट ने लोढ़ा की ओर से दायर जनहित याचिका में 19 फरवरी, 2007 को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे। उनकी पालना नहीं होने पर अवमानना याचिका दायर की गई थी।
कोर्ट ने यूं बयां की पीड़ा
शहर में फुटपाथ और सडक़ों पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हो रहे हैं। पैदल चलने वालों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। फुटपाथ पर अनाधिकृत केबिन लगा दिए गए हैं। यह सब अधिकारियों की आंखों के सामने हो रहा है। फुटपाथ पर पार्किंग निषिद्ध है, लेकिन बेरोकटोक जारी है। स्थानीय अधिकारियों का मौन समर्थन से फुटपाथ पर कई पूजा स्थल बना दिए गए हैं। अब समय आ गया है कि अधिकारियों को सख्त कार्रवाई करनी होगी। फुटपाथ अतिक्रमण मुक्त करने होंगे। कोर्ट ने कहा कि शहर की सड़कों की हालत बदतर हो चुकी है। कई सड़कें गड्ढ़़ों में तब्दील हो गई हैं। इससे न केवल वाहनों को क्षति पहुंच रही हैं, बल्कि यात्रियों को भी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस कोर्ट ने वर्ष 2007 में यह आदेश दिया था कि उचित पार्किंग स्थल अधिसूचित किए जाएं, इसके बावजूद शहर के व्यस्ततम क्षेत्रों में बेतरतीब ढंग से निजी बसें खड़ी की जा रही हैं।
यातायात पुलिस में एक तिहाई नफरी
कोर्ट ने यातायात पुलिस में नफरी की कमी पर भी चिंता जताई। कोर्ट को बताया गया कि यातायात पुलिस में विभिन्न श्रेणियों के 701 पद स्वीकृत है, लेकिन वर्तमान में केवल 250 व्यक्ति ही तैनात हैं। सहायक आयुक्त, इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर के पदों के अलावा हैड कांस्टेबल के 17 पद और कांस्टेबल के 413 पद खाली पड़े हैं। सरकार ने बताया कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद केवल 100 कांस्टेबल यातायात पुलिस को मिलने की संभावना है। पीठ ने इस तथ्य पर भी हैरानी जताई कि यातायात ड्यूटी पर लगाए गए होम गाड्र्स को पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं दिया जाता। कोर्ट ने भर्तियां होने तक होम गाड्र्स की सेवाएं नियमित रखने तथा उन्हें प्रशिक्षण देने को कहा है।
रक्षा मंत्रालय व परिवहन मंत्रालय सुलझाएं रिंग रोड विवाद
नाग तालाब के निकट रिंग रोड निर्माण पर सेना को आपत्ति मामले में कोर्ट ने सेना और नेशनल हाईवे ऑथोरिटी का पक्ष सुनने के बाद रक्षा मंत्रालय और सड़क परिवहन एवं हाईवे मंत्रालय के सचिवों को आदेश प्राप्त होने के दो सप्ताह के भीतर आवश्यक निर्णय लेने को कहा है। दोनों मंत्रालय निर्णय लेने से पहले इस तथ्य को ध्यान में रखें कि रिंग रोड महत्वपूर्ण व व्यापक जनहित की परियोजना है। सेना ने रिंग रोड निर्माण पर यह कहते हुए आपत्ति प्रकट की थी कि यह एक संवेदनशील संस्थापन के 900 मीटर के दायरे में आ रही है, जबकि रक्षा मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार इस सीमा में कोई निर्माण नहीं हो सकता।
समय सीमा के साथ दिए कई दिशा-निर्देश
-जोधपुर ट्रैफिक कंट्रोल बोर्ड को तीन महीने में यातायात नियंत्रण के लिए मास्टर प्लान तैयार करने और यातायात नियंत्रण प्रणाली के आधुनिकीकरण के लिए उचित कार्यवाही की जाए।
-राज्य सरकार छह माह में जोधपुर में यातायात पुलिस के सभी रिक्त पद भरे।
- नगर निगम के क्षेत्राधिकार में आवासीय और वाणिज्यिक इमारतों में पार्किंग सुनिश्चित करने को प्रभावी प्रावधान सख्ती से लागू किए जाएं।
-किसी भी इमारत में यह संतुष्ट होने पर कि अपेक्षित पार्किंग छोड़ी गई है, पूर्णता प्रमाण पत्र जारी होने के बाद ही उसमें कामकाज शुरू करने की अनुमति दी जाए।
-जेडीए और नगर निगम दो महीनों में मौजूदा इमारतों की स्वीकृत योजनाओं में निर्दिष्ट पार्किंग स्थानों को बहाल कराने के लिए प्रभावी कदम उठाएं।
-नगर निगम एक सप्ताह के भीतर समाचार पत्रों में इस आशय की एक सार्वजनिक सूचना प्रकाशित करे जिसमें इमारत के मालिकों से दो सप्ताह में निर्दिष्ट पार्किंग स्थानों को पुनस्र्थापित करने के की अपील की जाए। इस अवधि के बाद पार्किंग स्थान को बहाल करने में विफल रहने वाली इमारतों को सीज करने तथा मालिकों के लिए दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
-सीज की गई इमारत को अपेक्षित पार्किंग को बहाल करने तक सीज मुक्त नहीं किया जाए।
-जेडीए नगर निगम तीन महीने के भीतर फुटपाथ और सार्वजनिक रास्तों पर सीढि़यां, रैंप, केबिन, होर्डिंग्स या फैंसिंग लगाकर किए गए अतिक्रमण हटाने के लिए आवश्यक कदम उठाए।
-जेडीए एवं निगम को तीन महीने की अवधि में जीर्ण शीर्ण हो चुकी शहर की सडक़ों तथा फुटपाथों का रखरखाव व मरम्मत कार्य हाथ में लेने के निर्देश। यह कार्य त्वरित गति से संपादित करने को कहा।
-जेडीए एक्ट की धारा 13(3) के तहत शहर में यातायात के खतरों और बाधाओं को दूर करने की हिदायत।
-जोधपुर ट्रैफिक कंट्रोल बोर्ड को यह सुनिश्चित करने के निर्देश कि जोधपुर शहर में जहां-तहां बस
स्टैंड या हॉल्टिंग स्टेशन संचालित नहीं हो पाएं। बसों का संचालन केवल अधिसूचित बस स्टैंड या हॉल्टिंग स्टेशन से ही किया जाए। छह महीनों में अधिसूचित निजी बस स्टैंड विकसित करने के निर्देश।
- जोधपुर ट्रैफिक कंट्रोल बोर्ड, ट्रैफिक पुलिस और परिवहन अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि निजी बस मालिकों द्वारा, जो कांट्रेक्ट कैरिज है, उन्हें स्टेट कैरिज की तरह सार्वजनिक स्थानों से बस संचालन की अनुमति नहीं दी जाए।
- महेन्द्र नाथ अरोड़ा सर्किल से तीन लेन सड़क बिछाने की परियोजना को छह महीने की अवधि में पूरा किया जाए। जोधपुर डिस्कॉम व रक्षा मंत्रालय को उनके संस्थापन के बिजली पोल शिफ्ट करने को कहा। इसके कारण परियोजना में विलंब नहीं होना चाहिए।
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