राजस्थान के दो शहरों में शुरू किया पायलट प्रोजेक्ट, वाटर बॉडीज की क्षमता बढ़ाने में काम करेगी जर्मन सरकार

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अविनाश केवलिया/जोधपुर. जोधपुर जिले में जल संरक्षण, संसाधन और भूजल बढ़ोतरी के लिए भारत सरकार के साथ मिलकर जर्मन सरकार भी काम करेगी। वाटर सिक्योरिटी एंड क्लाइमेट अडेप्शन इन रूरल इंडिया (वास्का) के तहत जीयोग्राफिक इंर्फोमेशन सिस्टम लगाने का काम पायलट प्रोजेक्ट के रूप में जोधपुर में पूरा हुआ है। यह प्रोजेक्ट प्रदेश में महज दो शहरों को शामिल किया गया है। इसमें जोधपुर के साथ डंूगरपुर जिला भी शामिल है। डाटा संग्रहित करने के बाद व्यक्तिगत प्रोजेक्ट के लिए भी जर्मन सरकार से फंड मिलने की उम्मीद है।

पिछले दिनों जर्मन फेरल मिनिस्ट्री फोर इकोनॉमिक कॉर्पोरेशन के साथ भारत सरकार ने एमओयू किया है। जल शक्ति मंत्रालय व ग्रामीण विकास मंत्रालय इन कार्यों को देशभर में क्रियान्वित करेगी। केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्रसिंह शेखावत की पहल पर प्रदेश में फिलहाल दो शहरों को पायलट प्रोजेक्ट में चुना गया है। यदि यहां सफल होता है तो यह प्रोजेक्ट पूरे प्रदेश में लागू होगा। अभी इसके लिए फंडिंग की रूपरेखा नहीं बनी है। लेकिन जल्द ही कई प्रोजेक्ट भी इसमें शामिल किए जाएंगे।

जोधपुर का प्रजेंटेशन हुआ
वास्का प्रोजेक्ट के लिए बीते दिनों जयपुर में एक कार्यशाला रखी गई थी। इसमें जर्मन फेडरल सरकार के साथ भारत सरकार व प्रदेश की सरकार के अधिकारी मौजूद थे। जोधपुर से मनरेगा कार्यों को देख कर अधिशासी अभियंता सोम शर्मा ने वहां प्रजेंटेशन दिया है। उन्होंने बताया कि फिलहाल स्वीकृत कार्यों को ऑनलाइन दर्शाने का काम किया जाना है। जीआइएस आधारित काम पहले ही चल रहा है। जोधपुर में इसके लिए एक कंट्रोल सेंटर स्थापित होगा। यहां एक्सपर्ट के रूप में कुछ कर्मचारी भी डेटा मॉनिटरिंग के लिए पदस्थापित होंगे।

जोधपुर के आस-पास रिवर बेसिन पर होगा काम
फिलहाल जोधपुर के आस-पास रिवर बेसिन पर काम करने की प्लानिंग की गई है। इसमें लूणी व जोजरी नदी का बेसिन जो कि प्रदूषण के कारण खराब हो रहा है, उसको बचाने का प्रोजेक्ट भी इसमें शामिल किया जाएगा।

यह काम हो सकते हैं
- नदी में उद्योगों का वेस्ट न जाए इसके लिए काम होगा।
- शहर का अपशिष्ट जो नाले के जरिये जा रहा है उसका भी अधिकतम पुनर्उपयोग हो सकेगा।
- कई गांवों में वाटर बॉडीज निर्माण के काम भी हो सकेंगे।
- कायलाना बड़े जल स्रोतों में पानी संचित रखने के कारण होने वाले सीपेज का भी अधिकतम उपयोग करने पर मंथन होगा।
- पूरे जिले में गिरते भूजल स्तर को बढ़ाने की योजना भी बनेगी।
- सीएसआर फंडिंग से भी जलस्रोतों के संरक्षण के लिए काम होगा।
- पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए भी काम होगा।

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