जोधपुर. किसी के पिता कृषक थे, थोड़े दिन गांव में रहे। उसके बाद दूसरे गांव में पलायन कर गए। मुन्नी की पढ़ाई बीच सत्र में ही छूट गई। पप्पू के पिता की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी। वे रोजगार की तलाश में इधर-उधर भटकते रहते हैं। कइयों को माता-पिता ने ही स्कूल नहीं भेजा। ऐसे ही करीब आठ हजार बच्चों को शिक्षा विभाग अब शिक्षा की मुख्यधारा से जोडऩे के लिए स्कूल ला रहा है। ऐसे बच्चे जोधपुर जिले में करीब 8 हजार हैं, इनके नामों की सूची भी तैयार कर ली गई है।
राज्य सरकार के निर्देश के बाद शिक्षा विभाग जिले के ऐसे विद्यार्थियों को गैर आवासीय शिविर लगाकर अब शिक्षित करेगा। ड्रॉप आउट व अनामांकित ज्यादातर बच्चे ग्रामीण इलाकों से हैं। जबकि शहर ब्लॉक में कुछेक जगह पर अनामांकित व ड्रॉप आउट बच्चे मिले हैं।
14 साल के हो गए, लेकिन नहीं देखा स्कूल
शिक्षा विभाग की तैयार सूची में कई बच्चे 13-14 साल के हो गए, लेकिन उन्होंने कभी स्कूल का मुंह नहीं देखा। इनमें कइयों के परिवार की हालत बेहद खराब है। कई बच्चों के पिता काम नहीं करते। कइयों के सिर से माता या पिता का साया भी उठ चुका है। ऐसे बच्चों को शिक्षा विभाग आयु अनुरूप कक्षा में प्रवेश दिलाएगा। ये अनामांकित व ड्रॉप आउट बच्चे बालेसर, तिंवरी, बाप, भोपालगढ़, बापिणी, शेरगढ़ सहित कई ब्लॉक से हैं।
इनका कहना
राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद् के निर्देशानुसार ब्लॉक स्तर पर कैंप आयोजित किए जाएंगे। ताकि शिक्षा से वंचित बच्चे समाज की मुख्य की धारा से जुड़ सके। पिछले साल ब्लॉक लेवल पर शिविर हुआ था। इस बार तैयारियां की जा रही है। शिविर गैर आवासीय होगा। इसके अलग-अलग केन्द्र निर्धारित किए जाते हैं।
- प्रेमचंद सांखला, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, जोधपुर
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