जोधपुर.
आज पूरे शहर में पानी नहीं आएगा। अगले साल इंदिरा गांधी नहर के प्रस्तावित क्लोजर के लिए शहर के प्रमुख जलस्रोतों में पानी संग्रहण के लिए जलदाय विभाग ने अभी से काम शुरू कर दिया है। मुसीबत यह है कि अगले साल जितने दिन का क्लोजर प्रस्तावित किया गया है, उसके आधे दिन के लिए भी शहर को पानी पिलाने की व्यवस्था फिलहाल नहीं है। यही वजह है कि पीएचईडी अधिकारियों ने लिख कर दे दिया है कि प्रस्तावित 70 दिन के क्लोजर के लिए जल संचय की व्यवस्था करना संभव नहीं होगा।
प्रमुख जलस्रोत कायलाना व तख्तसागर में कायलाना में 50 फीट व तख्तसागर में 40 फीट (185 एमसीएफटी ) पानी है। इसमें भी 120 एमसीएफटी डेड स्टोरेज है। यानि कि काम में आने वाला पनी 65 एमसीएफटी ही है। इससे महज 5 दिन ही शहर की आबादी को पेयजल उपलब्ध कराया जा सकता है। अगले वर्ष शटडाउन की तैयारी के लिए 250 एमसीएफटी से अधिक पानी इन जलाशयों में संचित होना जरूरी है।
कब से लिया जा रहा
पिछले साल जुलाई माह से शटडाउन शुरू हुआ जो कि मार्च तक चला। इसके बाद छह यह शटडाउन नहीं हुआ। अब नवम्बर से माह में दो बार शटडाउन एक बार फिर शुरू हो रहा है।
अब आगे क्या
यह शटडाउन इसी प्रकार अगले वर्ष क्लोजर तक चलने की आशंका है। 25 मार्च से जलसंसाधन विभाग ने क्लोजर प्रस्तावित किया है। अब तक अलग-अलग दिन 24 घंटे के कुल 18 दिन के शटडाउन हो चुके हैं।
इसलिए है समस्या
हर साल गर्मियों से पहले रखरखाव के लिए क्लोजर लिया जाता है। करीब 30 से 40 दिन के प्रस्तावित क्लोजर होता है। इसके लिए राजीव गांधी लिफ्ट केनाल और शहर के प्रमुख जलाशयों में पोंडिंग की जाती है। ऐसे में सामान्य तौर पर पेयजल सप्लाई को 35 दिन तक नियमित रखा जा सकता है। लेकिन 70 दिन तक जोधपुर जिले को पानी पिलाने के लिए पोंडिंग की व्यवस्था नहीं है। वैकल्पिक व्यवस्था भी पीएचईडी करने में असमर्थ है।
अब 45 दिन का दिया प्रपोजल दिया
70 दिन के प्रस्तावित क्लोजर से पीएचइडी के इनकार के बाद अब मुख्य नहर से 45 दिन में ही पानी छोडऩे का प्रस्ताव जलसंसाधन विभाग ने दिया है। लेकिन उसके बाद भी 5-7 दिन पानी को जोधपुर पहुंचने में लगेंगे। फिलहाल इस प्रस्ताव पर कोई सहमति नहीं बनी है।
कायलाना-तख्तसागर से ढाई गुना बड़ी झील है प्रस्तावित
राजीव गांधी लिफ्ट केनाल के तीसरे चरण में सबसे बड़ी झील का निर्माण भी केनाल जीरो पॉइंट के समीप प्रस्तावित किया गया है। इसकी क्षमता 865 एमसीएफटी पानी की रखी गई है जो कि कायलाना-तख्तसागर दोनों जलाशयों की क्षमता की ढाई गुना है। इस प्रोजेक्ट की फाइल केन्द्र सरकार के पास ऋण के लिए अटकी है। यदि यह प्रोजेक्ट समय पर स्वीकृत हो जाता तो 70 दिन का पानी आसानी से सहेजा जा सकता था।
इनका कहना है...
‘हमने सरकार को अवगत करवा दिया है कि 70 दिन की पोंडिंग करना संभव नहीं है। अधिकतम 30-35 दिन का ही पानी संचय कर सकते हैं। अभी सरकार के स्तर पर इसका मंथन हो रहा है। फिलहाल तो शटडाउन कर वाटर लेवल बढ़ाने के प्रयास कर रहे हैं।
- नीरज माथुर, अतिरिक्त मुख्य अभियंता, पीएचइडी जोधपुर।
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