सुधार गृहों में कार्मिकों के पद खाली क्यों?

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जोधपुर.

राजस्थान हाईकोर्ट (rajasthan highcourt) ने राज्य के बाल सुधार और संप्रेषण गृहों (Child Improvement and Communication Homes of State Govt.) में मंत्रालयिक कार्मिकों के खाली पद भरने की प्रक्रिया प्रारंभ नहीं करने पर नाराजगी प्रकट करते हुए बाल अधिकारिता विभाग के सचिव (Secretary, Department of Child Empowerment) को 26 नवंबर को व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने को कहा है।

कोर्ट ने जोधपुर में प्रस्तावित स्किल डवलपमेंट एंड ट्रेनिंग सेंटर (Proposed Skill Development and Training Center in Jodhpur) के लिए बजट में किसी तरह की कटौती नहीं करने की हिदायत देते हुए संबंधित विभागों को अन्य जिलों के बाल अपचारियों को दक्ष करने के लिए जोधपुर में एक हॉस्टल सुविधा उपलब्ध करवाने के भी निर्देश दिए हैं।

न्यायाधीश संदीप मेहता की एकलपीठ में स्वप्रसंज्ञान के आधार पर दर्ज याचिका की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता फरजंद अली की ओर से पेश जोधपुर में नागौर रोड पर प्रस्तावित स्किल डवलपमेंट एंड ट्रेनिंग सेंटर के भूतल और प्रथम तल का मानचित्र कोर्ट ने रिकॉर्ड पर ले लिया।

एक खाली सरकारी भवन में प्रस्तावित इस सेंटर के लिए कार्यकारी एजेंसी की जरूरत के लिहाज से बजट आवंटन शीघ्रातिशीघ्र करने के निर्देश दिए गए हैं।

कोर्ट को बताया गया कि राज्य सरकार ने सेंटर के लिए 91.88 लाख रुपए स्वीकृत किए हैं। लेकिन 32.82 लाख रुपए की अतिरिक्त मांग पर अब तक स्वीकृति नहीं आई है।

कोर्ट ने संबंधित विभागों को प्रथम तल पर निर्माण के लिए अतिरिक्त राशि की मांग स्वीकृत करने को कहा है।
एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि बजट का आवंटन केंद्र प्रवर्तित एकीकृत बाल संरक्षण योजना के अनुपयोगी बजट के पुन: आवंटन से किया जाना है और इससे राज्य पर कोई वित्तीय भार भी नहीं आएगा, इसलिए बजट में कटौती नहीं की जाए।

सेंटर के बाद हॉस्टल की जरूरत: कोर्ट ने कहा कि स्किल डवलपमेंट सेंटर बनने के बाद इससे बड़ी संख्या में बाल अपचारी लाभान्वित हो सकते हैं।

अन्य जिलों के बाल अपचारियों को भी यहां लाकर प्रशिक्षण दिया जा सकता है। इसके लिए एक हॉस्टल का निर्माण जरूरी है। वर्तमान भवन की तृतीय तल पर ऐसे हॉस्टल के निर्माण को लेकर संबंधित विभागों को नक्शा तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

हाईकोर्ट प्रशासन को शीघ्र भर्ती के निर्देश

न्याय मित्र अनिरूद्ध पुरोहित ने सुधार गृहों मेंं मंत्रालयिक कर्मचारियों के खाली पदों का मुद्दा उठाया और कहा कि भर्ती प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं की गई है।

यह भी बताया गया कि प्रत्येक जिला मुख्यालय पर किशोर न्याय बोर्ड के लिए 34 प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट के पदों के अलावा 204 मंत्रालयिक कार्मिकों के पद सृजित किए जा चुके हैं, लेकिन भर्ती हाईकोर्ट प्रशासन द्वारा की जानी है।

न्यायाधीश मेहता ने रजिस्ट्रार (परीक्षा) को यह भर्तियां जल्द सुनिश्चित करने को कहा। कोर्ट ने चाइल्ड राइट्स एक्टिविस्ट गोविंद बेनीवाल को राज्य में आठ बाल सुधार गृह बंद करके बच्चों को एनजीओ द्वारा संचालित गृहों में संचालित करने के निर्णय के मद्देनजर संस्थाओं के सुधार गृहों का निरीक्षण कर रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

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