जोधपुर में है संतोषी माता का एकमात्र ऐसा मंदिर जहां प्रकट हुई थी मूर्ति, नवरात्रा में होता है विशेष पूजन

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जोधपुर. प्राकृतिक पहाडिय़ों से घिरा संतोषी माता मंदिर पूरे देश में शक्ति पीठ माना जाता है। चट्टान के बीच प्राकृतिक सौन्दर्य से घिरे मंदिर के मुख्य गर्भगृह की चट्टानें भी मानो शेषनाग की तरह माता की मूर्ति पर छत्रछाया करती नजर आती है। जोधपुर के मंडोर रोड कृषि मंडी के पीछे स्थित मंदिर में शारदीय नवरात्रा के दौरान मंदिर में अखंड ज्योत, हवन एवं कीर्तन का आयोजन होता है। जिसमें जोधपुर सहित दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, मध्यप्रदेश, चंडीगढ़, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश व कोलकाता से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

अष्टमी के दिन हवन के बाद माता के भक्त कन्याओं का दैवीय रूप में पूजन करते हैं। प्रत्येक शुक्रवार को भी मंदिर में मेले सा माहौल रहता है। मंदिर गर्भगृह से सटे करीब 18 फुट गहरे प्राकृतिक अमृत जलकुंड के ऊपर एक हरे भरे वट वृक्ष की खुली जड़ें जलकुंड के पानी को नमन करती नजर आती हैं। पिछले करीब पौने दौ सौ साल से वट वृक्ष का आकार जस का तस बना हुआ है। मंदिर व्यवस्थापक जगदीश सांखला ने बताया कि उद्यापन के लिए बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिर परिसर में धर्मशाला है जहां केवल परिवार सहित आने वाले श्रद्धालुओं को ठहरने की नि:शुल्क सुविधा है।

माता को सिर्फ गुड़ और चना की प्रसादी चढ़ाई जाती है। सांखला ने बताया कि संतोषी माता की देश भर में एकमात्र प्रगट मूर्ति होने के कारण लोगों की आस्था है। मंदिर में माता के चरण दर्शन हैं। मंदिर विकास के लिए किसी तरह का कोई चंदा नहीं लिया जाता है और ना ही माता की चौकी लगाई जाती है।



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