जोधपुर. प्रख्यात गांधीवादी विचारक व आलोचक डॉ. नंदकिशोर आचार्य ( Dr Nandkishore Acharya ) ने कहा कि सरकारें लोगों से कहती हैं कि गाड़ी कम चलाएं। दूसरी तरफ ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री डवलप करने की बात करते हैं। यह आर्थिक हिंसा है। वे जाने-माने सर्वोदयी व गांधीवादी नेमिचंद्र जैन भावुक ( Nemichandra Jain Bhawuk ) की पुण्य तिथि पर सोमवार को गांधी भवन में 'गांधी जी ( Mahatma Gandhi ) और हमारा देशकाल' विषयक व्याख्यानमाला ( lecture ) में बतौर मुख्य वक्ता उदबोधन दे रहे थे।
डॉ.आचार्य ने कहा कि हिंसा केवल शारीरिक नहीं होती, वह कई तरह की होती है। हिंसा के कई सूक्ष्म रूप होते हैं। कई लोग गरीबी और भुखमरी के शिकार होते हैं। एक प्रत्यक्ष हिंसा आतंकवाद और हत्या है। दूसरी अप्रत्यक्ष हिंसा है, जो अधिक महत्वपूर्ण है। संरचनात्मक और संरचनागत हिंसा, सामाजिक हिंसा, आर्थिक व राजनीतिक हिंसा है। जिस तरह से हम अपने विचार और भाषा दूसरों पर थोपने की कोशिश करते हैं, वह भी एक तरह की हिंसा है। इससे पूर्व डॉ.पद्मजा शर्मा ने नेमिचंद्र जैन भावुक का परिचय दिया। हेना भट्टाचार्य ने भजन प्रस्तुत किया। संचालन गांधी शांति प्रतिष्ठान के मानद सचिव डॉ. भावेंद्र शरद जैन ने किया।
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