अविनाश केवलिया/जोधपुर. ‘अमृत’ के रास्ते में अतिक्रमण की बहार हर शहर में है। जोधपुर के प्रमुख जलस्रोतों के कैचमेंट क्षेत्र भी ऐसे ही अतिक्रमण से भरे पड़े हैं। इसी कारण जलस्रोतों में पानी की आवक नहीं हो रही। सुप्रीम कोर्ट ने केरल कोस्टल क्षेत्र में बनी बहुमंजिला इमारत को ध्वस्त करने का आदेश दिया है। ऐसे में एक उम्मीद हमारे प्रदेश और सूर्यनगरी के जलस्रोतों के अतिक्रमणों के हटने की भी जगी है।
‘राजस्थान पत्रिका’ ने समय-समय पर जलस्रोतों के मार्ग में अतिक्रमण के मुद्दे उठाए हैं। अब तक अवैध निर्माण और अतिक्रमणों पर जुर्माना लगाकर नियमित करने की कार्रवाइयां देखने को मिली थी। लेकिन इस बार सुप्रीम कोर्ट ने अतिक्रमण ध्वस्त करने के आदेश दिए हैं। इससे अतिक्रमियों को कठोर संदेश जाएगा। जोधपुर के तीनों प्रमुख जलस्रोत उम्मेद सागर, कायलाना-तख्तसागर और सुरपुरा बांध के कैचमेंट में अतिक्रमणों की भरमार है।
क्या है जलस्रोतों की स्थिति
- उम्मेद सागर जलाशय काफी प्राचीन है। इस बांध की कुल क्षमता 280 एमसीएफटी है। इस बार इसमें 40 एमसीएफटी पानी ही आ पाया। यानि क्षमता का 15 प्रतिशत पानी। इसका कारण है कैचमेंट क्षेत्र में बसी कॉलोनियां। इन्हें चिह्नित किया गया, लेकिन अतिक्रमण हटे।
- सुरपुरा बांध की कुल भराव क्षमता 21.65 मिलीयन क्यूबिक मीटर है। इस बार सिर्फ 80 एमसीएफटी पानी (क्षमता का 10 प्रतिशत) आया है। इसके कैचमेंट में कई कॉलोनियां कट गई है। 200 से ज्यादा अतिक्रमण चिह्नित हैं।
- जसवंत सागर बांध की भराव क्षमता 280 एमसीएफटी है। इसमें सिर्फ 25-30 एमसीएफटी पानी (क्षमता का 10 प्रतिशत से भी कम) आया है। वह भी रिसाव के कारण जमीन में चला गया। कारण , इसके कैचमेंट में बजरी खनन और उससे बने बड़े-बड़े गड्ढे।
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