जोधपुर. शहर के यूथ पढ़ाई, एडवेंचर गतिविधियों के साथ अपने शौक को पूरा करने के साथ पर्यावरण और पक्षी संरक्षण भी कर रहे हैं। मल्टी टास्किंग एक्टिविटीज को पसंद करने वाले अचीवर्स सोसायटी के युवाओं का ग्रुप पक्षियों की देखभाल के लिए अनोखा काम कर रहे हैं। सोसायटी की ओर से गौरेया पक्षी के सुरक्षित रहवास के बॉयोडिग्रेडेबल घरौंदा बनाया गया है। वैज्ञानिक तरीके से बनाया यह घरौंदा समय के साथ सडऩे-गलने पर मिट्टी में मिल जाएंगे। इससे किसी प्रकार का प्रदूषण भी नहीं होता है। युवा टीम पर्यावरण संरक्षण में भी सक्रिय है। पौधरोपण व उनकी देखभाल के साथ प्राचीन जल स्त्रोतों की सफाई का काम भी कर रहे हैं।
चिडिय़ा की सुरक्षा के लिए विशेष घरौंदा
इस घरौंदे की बनावट ऐसी रखी गई है कि चिडिय़ा जो घोंसला बनाएगी, उसकी गहराई अच्छी होगी। चिडिय़ा के बच्चों के बाहर निकलने की संभावना नहीं के बराबर रहेगी। घरौंदे के बाहर एक डंडी लगाई है, जिस पर नर गौरेया बैठता है व घर की पूरी निगरानी रखता है।
कम होती संख्या पर उठाया कदम
सोसायटी महासचिव भूपेन्द्र जोशी ने बताया कि गौरैया के संवर्धन के लिए सोसायटी की ओर से घरौंदे बनाने का निर्णय लिया गया। किसी जमाने में लोग अपने घरों की दीवारों में भी चिडियों के रहने के लिए घर बनाते थे, जिससे गौरैया को सुरक्षित जगह मिल जाती और वो अंडे दे सकती थी। ऐसे घर पुराने शहर मे देखे जा सकते है। अब लोगों की परिस्थिति और मानसिकता में बदलाव आ गया है। गौरैया के छोटे-छोटे घरों को प्लास्टर के नीचे दबा दिया गया है या नए घरों में गौरेया के लिए घरौंदे बनाए ही नहीं जाते। ऐसे में गौरैया की संख्या में काफ ी कमी हो रही है। जोशी ने बताया कि उनकी टीम में प्रभात सांखला, राहुल गांधी, यश धूत, देवेश दवे, गौरांग बोहरा युवा शामिल है।
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