जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट (rajasthan highcourt) ने ट्विटर (twitter) पर एक समुदाय विशेष की भावनाओं को कथित तौर पर आहत करने में मामले में दर्ज एफआइआर रद्द करने को लेकर दायर याचिकाओं की सुनवाई 27 नवंबर तक टाल दी। तब तक इस मामले में ट्विटर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (Twitter CEO ) जैक डोरसे और एक अन्य आरोपी अन्ना एमएम विटीकेड की गिरफ्तारी पर रोक यथावत रहेगी।
एक समुदाय की भावनाएं आहत करने को लेकर डोरसे के खिलाफ जोधपुर पुलिस कमिश्नरेट के बासनी थाने में दर्ज मामले को रद्द करने को लेकर डोरसे ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रखी है।
इस मामले की जांच के दौरान पुलिस ने एक अन्य आरोपी विटीकेड से भी पूछताछ के प्रयास किए, इसके बाद उन्होंने भी हाईकोर्ट में एफआइआर रद्द करने को लेकर याचिका दायर की।
कोर्ट ने दोनों की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए थे। न्यायाधीश मनोज कुमार गर्ग की एकलपीठ में बुधवार को दोनों मामलों की सुनवाई नियत थी, जिसे कोर्ट ने 27 नवंबर तक टाल दिया। अभियोजन के अनुसार एक महिला अन्ना एमएम विटीकेड के ट्विटर हैंडल से कथित विवादित पोस्ट की गई थी, जिस पर अग्रिम अनुसंधान किया जा रहा है।
गौरतलब है कि बासनी पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी में डोरसे पर ब्राहमण समाज की कथित मानहानि का आरोप लगाया गया है। डोरसे की ओर से कोर्ट और पुलिस को बताया गया कि भारत यात्रा के दौरान, डोरसे ने पिछले साल 13 नवंबर को कुछ प्रमुख महिलाओं के साथ ट्विटर प्लेटफॉर्म का उपयोग करने के अनुभव साझा करने के लिए एक बैठक का आयोजन किया था। बैठक के अंत में कमरे में किसी ने एक ग्रुप फोटो के लिए बुलाया। एक दलित कार्यकर्ता ने एक पोस्टर डोरसे को दिया, जिस पर कथित विवादित टिप्पणी अंकित थी।
डोरसे के बचाव में कहा गया कि वह पोस्टर पर अंकित वाक्य का कोई अर्थ नहीं जानता था और न ही उसका मंतव्य किसी वर्ग विशेष पर कोई टिप्पणी करने का था। अगले दिन 14 नवंबर को बैठक की एक महिला प्रतिभागी ने ग्रुप फोटो मांगा, जिसे कंपनी के कर्मचारियों ने उसके व्यक्तिगत रिकॉर्ड के लिए साझा किया। एक अन्य प्रतिभागी अन्ना एमएम विटीकेड ने अपने ट्विटर हैंडल पर उस तस्वीर को पोस्ट किया।
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