विकास चौधरी/जोधपुर. 4जी के दौर में जोधपुर सेंट्रल जेल में लगे 2जी जैमर काफी पहले से नाकारा साबित हो चुके थे और कुछ दिन से ये पूरी तरह बंद हैं। यही वजह है कि सेंट्रल जेल में बंदी व कैदी धड़ल्ले से एंड्रॉयड मोबाइल का उपयोग कर रहे हैं। उधर, सुरक्षा प्रहरियों से सांठ-गांठ के चलते मोबाइल व मादक पदार्थ पहुंचने और जेलर पर मिलीभगत के आरोप लगाने संबंधी वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस मुख्यालय ने जेल के उप महानिरीक्षक कैलाश त्रिवेदी को जांच के आदेश दिए हैं।
आजीवन कारावास की सजा काट रहे पाली जिले में मावाड़ जंक्शन थानान्तर्गत कराड़ी निवासी आजादसिंह राजपुरोहित ने जोधपुर जेल में चल रहे अवैध गतिविधियों के संबंध में गत सोमवार को वीडियो वायरल किए थे। जिसमें बंदियों व कैदियों के खुलेआम स्मैक व अफीम का नशा करते दिखाया गया था। कैदी का आरोप था कि जेलर व अन्य अधिकारियों की सांठ गांठ से बंदियों तक मोबाइल और मादक पदार्थ पहुंच रहे हैं। इस संबंध में गत मंगलवार को राजस्थान पत्रिका में ‘स्मैक, अफीम या चरस! सब मिलता है जोधपुर जेल में’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था।
दरकार 4जी जैमर की, 2जी के आठ जैमर बंद
जेलर जगदीश पूनिया ने बताया कि जोधपुर जेल में वर्षों पूर्व 2जी के आठ जैमर लगाए गए थे। कुछ दिन पहले आठों जैमर बंद हो गए। जेल प्रशासन ने 4जी जैमर लगाने के लिए प्रस्ताव भेज रखा है। राज्य की अन्य सेन्ट्रल जेलों में 4जी जैमर लग चुके हैं।
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