जोधपुर. सोशल मीडिया पर इन दिनों बिना सोचे समझे, तथ्यों की परख किए बगैर ही सूचनाएं इधर से उधर भेजी जा रही है। लगातार हो रहे सोशल मीडिया के इसी दुरुपयोग के बीच सुप्रीम कोर्ट ने भी ङ्क्षचता जाहिर करते हुए इसे एके-47 से भी खतरनाक बताया है। साथ ही इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए सरकार से गाइडलाइन भी बनाने को भी कहा है। ऐसे में सोशल मीडिया से क्या नुकसान है, फेक न्यूज को कैसे रोका जाए इसी पर चर्चा के लिए पत्रिका प्लस टीम ने बुधवार को मेडिकल स्टूडेंट्स के साथ चर्चा की। जिसमें शामिल हुए स्टूडेंट्स ने कहा कि सरकार सोशल मीडिया को लेकर सख्त कानून बनाएं, इसे आधार से भी जोड़ें, लेकिन यूजर को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी तभी सही मायने में इसके दुरुपयोग को रोका जा सकेगा।
समाज में फेल रही नेगेटिविटी
स्टूडेंट्स का कहना था सोशल मीडिया करंट टाइम में समाज में बहुत भयानक रुप ले चुका है। इससे होने वाले फायदों की आड़ में इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इसके माध्यम से चलाई जाने वाली फेक न्यूज से कितने ही लोगों को जान गंवानी पड़ी, कईयों के घर बर्बाद हो गए। समाज में नकारात्कता फैल रही है।
इसलिए इस पर अंकुश लगाना बेहद जरुरी है। समाज को जागरुक करना जरुरी है।
चर्चा में महेश बुरड़, दीपक वर्मा, आरडी जाखड़, ताराचंद पूनिया, सुरेश चौहान, लोकेश जाट, निर्मल गहलोत सहित कई स्टूडेंट्स ने अपनी राय रखी।
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2mHbPQx
0 comments:
Post a Comment