जोधपुर. पड़ौसी देश पाकिस्तान से राजस्थान और गुजरात में क्रीमियन कांगो हेमेरेजिक फीवर बीमारी (सीसीएचएफ) फैलने का खतरा पैदा हो गया है। राजस्थान से लगते पाकिस्तान के सिंध प्रांत में सीसीएचएफ के अब 45 रोगी सामने आ चुके हैं, जिसमें 16 की मौत हो चुकी है। बलूचिस्तान में 25 में से 5 रोगियों ने अस्पताल में दम तोड़ दिया है। पाकिस्तान में कांगो आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है और स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है। विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान से भारत आ-जा रहे लोगों में इस बीमारी का वायरस फैलने का खतरा है। सीमा पार करके आ रहे मवेशी और पालतु पशुओं से भी अब खतरा जताया जा रहा है। जोधपुर में 2015 के बाद अब सीसीएचएफ के तीन संदिग्ध रोगी सामने आए हैं। इसके अलावा अहमदाबाद में भी कुछ रोगियों में इसकी पुष्टि हुई है।
बकरा ईद के बाद पाकिस्तान में सीसीएचएफ के मामले एक दम से बढ़ गए। बकरों के सम्पर्क में आने से वायरस इंसानों में तेजी से फैला। अकेले सिंध की राजधानी करांची में 16 लोगों की मौत हो गई, जिसमें से 10 लोगों की मौत अगस्त महीने में हुई। मवेशी व पालतु पशुओं के सम्पर्क में आने पर यह बीमारी अधिक तेजी से फैल रही है। राजस्थान के श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर और बाड़मेर से लगती पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कई बार मवेशी सीमा पार आ जाते हैं। इन मवेशियों के शरीर पर सीसीएचएफ वायरस की वाहक हायलोमा चींचड़ चिपके रहने से वायरस के भारत के मवेशियों पर आने की आशंका है।
अभी तक नहीं बना है टीका
यह एक वायरस जनित बीमारी है। इसका वायरस हायलोमा चींचड़ के शरीर पर रहता है जो पशुओं पर चिपकी रहती है। पशुओं से यह वायरस इंसान में पहुंचा है। इसका पहला मामला 1944 में सोवियत संघ के क्रीमिया प्रदेश में और उसके बाद 1969 में अफ्रीकी देश कांगो में सामने आया, जिसके बाद इसका नाम क्रीमियन कांगो हेमेरेजिक फीवर रखा गया। अब तक इस बीमारी का टीका बाजार में उपलब्ध नहीं है। भारत में इसका पहला रोगी 2011 में सामने आया। अब तक राजस्थान, गुजरात और केरल में इसके मामले सामने आ चुके हैं।
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तेज बुखार व ब्लीडिंग लिए आए रोगी
सबसे पहले तेज बुखार, जी मचली, सिरदर्द, मसल्स, गर्दन व पीठ में दर्द होता है। इसके बाद उल्टी, दस्त, पेटदर्द और गले में खराश शुरू होने के बाद शरीर में ब्लीडिंग शुरू हो जाती है। पाकिस्तान के अस्पतालों में अधिकांश रोगी तेज बुखार के साथ ब्लीडिंग के लक्षण लिए भर्ती हुए थे। तीसरी स्टेज पर भर्ती होने वाले अधिकतर रोगियों की मौत हो गई। इस बीमारी में मृत्यु दर 30 प्रतिशत है।
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यह पशुओं से ही फैलती है। बॉर्डर पर पूरी तारबंदी की हुई है, जहां से पशुओं का आना संभव नहीं है। वैसे भी हमने जांच के लिए सैंपल भेजे हैं, जिसकी रिपोर्ट के बाद ही इस बीमारी के बारे में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
डॉ. युद्धवीर सिंह, उप निदेशक, चिकित्सा विभाग जोधपुर
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