धोरों के इंजीनियर्स मारवाड़ के पर्यटन और व्यापार को बना रहे ग्लोबल, तकनीक से कई गुणा बढ़ रहा एक्सपोर्ट

पोस्ट पसंद आये तो लाइक जरुर करे ?

अविनाश केवलिया/जोधपुर. तकनीक ने हमारे जीवनशैली बदली है इसमें कोई शक नहीं। लेकिन व्यापार को भी नए आयाम दिए हैं यह अब साबित होने लगा है। करीब एक दशक पहले तक इंटरनेट और वेबसाइट की दुनिया इतनी समृद्ध नहीं थी। लेकिन अब पिछले कुछ सालों में बदलाव आया है। अब हमारे धोरों के इंजीनियर ही यहां के व्यापार व उत्पाद को तकनीकी माध्यम से समृद्ध कर रहे हैं।

जोधपुर का हैंडीक्राफ्ट उद्योग हो या पर्यटन व्यवसाय या फिर कोई स्टार्टअप हो। इनमें तकनीक का इस्तेमाल बहुत जरूरी है। एक दशक पहले तक यहां आइटी विशेषज्ञ नहीं होने से व्यापार को बढ़ावा देने के लिए वेबसाइट का चलन कम था और ग्लोबल अप्रोच भी नहीं थी। लेकिन अब यहां के इंजीनियर मारवाड़ में ही सेवा देने लगे हैं। इसी कारण अब धोरों का व्यापार भी ग्लोबल हो चला है।

जोधपुर भी अब पीछे नहीं
- 20 से ज्यादा ऐसी कंपनियां हैं जहां वेबसाइट विकसित होती है।
- 100 से ज्यादा इंजीनियर्स एप डवलपमेंट करने वाले।
- करीब 1000 से ज्यादा इंजीनियर्स है जोधपुर में जो टेक्लीकल वर्क में जुटे हैं।

वर्क एट होम
जोधपुर में ऐसे सॉफ्टवेयर इंजीनियर भी है जो कि वर्क एट होम बेसिस पर काम करते हैं। इनमे ज्यादातर महिलाएं हैं। बड़ी आइटी सिटी जैसे ही बैंगलोर, पुणे, हैदराबाद, गुरुग्राम और मुम्बई जैसे शहरों की तर्ज पर जोधपुर में भी यह कल्चर प्रसिद्ध हो रहा है।

क्या है विशेष बातें
- ग्लोबल एक्सेस : 24 घंटे व सात दिन व्यापार चला सकते हैं।
- उपभोक्ता सर्विस बेहतर हुई है।
- प्रचार लागत कम होती है।
- कम पेपर वर्क हुआ।
- अपने व्यापार को कहीं से भी संचालित कर सकते हैं।
- अपने प्रोडक्ट और विशेषता बता सकते हैं।
- व्यापार व प्रोडक्ट के बारे में फीडबैक भी ले सकते हैं।
- पर्यटन व्यापार में उस स्थान की सीधी जानकारी देख सकते हैं।
- कई होटल व अन्य कैब वगैरह भी ऑनलाइन ही बुक किए जाते हें।

तकनीक ने बदल दी सूरत
वेबसाइट या तकनीकी संसाधन ने कई व्यापार की दिशा बदल दी है। जोधपुर का हैंडीक्राफ्ट उद्योग इसमें से एक है। टैक्नीकल एक्सपर्ट दीपकसिंह गहलोत का कहना है कि विदेशों में क्लाइंट बनाने में तकनीकी संसाधनों का काफी रोल है। ऑनलाइन की ऑर्डर और पेमेंट सिस्टम ने पिछले सालों में कई सकारात्मक परिवर्तन किए हैं। खास बात यह है कि अब मारवाड़ के युवा ही यहां के व्यापार की मदद करने लगे हैं। अब यहां का व्यापार बड़ी आईटी सिटी पर निर्भर नहीं है।

दुनिया हमारी तरफ देख रही
पहले जोधपुर व मारवाड़ के प्रोफेशनल इंजीनियर पलायन करते थे। लेकिन पिछले कुछ सालों में यह ढर्रा खत्म हुआ है। चाहे प्रोफेशनल कंपनियों की ग्रोथ कहें या स्टार्ट अप लेकिन अब युवा अपने घर पर रहकर ही काम करने लगे हैं। टैक्नीकल एक्सपर्ट अंकुर मिश्रा बताते हैं कि इसका फायदा कुछ ऐसे हुआ कि ये युवा अब अपने क्षेत्र के व्यापार को ग्लोबल बनाने में योगदान कर रहे हैं। अब जोधपुर किसी बड़ी आईटी सिटी से कम नहीं है।



from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/31ujb9Q
Share on Google Plus

About Atul

This is a short description in the author block about the author. You edit it by entering text in the "Biographical Info" field in the user admin panel.

0 comments:

Post a Comment