एम आई जाहिर/ जोधपुर. सुना के कोई कहानी हमें सुलाती थी, दुआओं जैसी बड़े पानदान की खुशबू। जी हां! पान की लाली और पान की खुशबू का जादू आज भी बरकरार है। बालीवुड में मिलेनियम स्टार अमिताभ बच्चन अभिनीत पुरानी और किंग खान शाहरुख खान अभिनीत नई फिल्म डॉन में एक बात कॉमन है और वह है खई के पान बनारस वाला नगमा। कभी नवाबी शौक माना जाने वाला पान( paan ) लखनवी अदा के साथ पेश किया जाता था, मगर अब यह आम आम आदमी का पान हो गया है। पान सिर्फ बनारस का नहीं, जोधपुर का पान ( jodhpuri paan ) भी मशहूर है। यहां हर चौराहे या नुक्कड़ पर पान की दुकान मिल ही जाएगी। अगर आप यह कहें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी कि .. खई के पान जोधपुर वाला, खुल जाए बंद अक्ल का ताला..। कत्थे की लाली और गुलकंद की महक से सजा जोधपुरी पान ( jodhpuri paan ) का बीड़ा बहुत ही खुशबूदार और लजीज होता है। यहां कई लोग तो खाना खाने के बाद पान खाना नहीं भूलते। जबकि तो कई बुजुर्ग पान खाए बिना नहीं रहते। परंपरा यह रही है कि जोधपुर के घरों में पहले बुजुर्ग कत्था चूना लगा कर ही पान खाते थे। अब यह चलन कम हो गया है। बात जब पान की चली तो पत्रिका ने शहर में पान की दुकानों और पान खाने वालों का जायजा लिया।इससे पता चला कि जोधपुर में पान की छोटी बड़ी करीब 3000 दुकानें ( paan shops ) हैं और जोधपुर के लोग रोजाना औसतन 30 हजार पान खाते हैं। अलबत्ता त्योहरों पर यह तादाद बढ़ भी जाती है। ईद, रक्षाबंधन, दीपावली और भाईदूज पर पान की बिक्री बढ़ जाती है। पान विक्रेताओं ने बताया कि आज से पच्चीस- तीस साल पहले यह संख्या बहुत ज्यादा थी, तब घर-घर दादी- नानी के पानदान तो थे ही, पान की दुकानों पर पान खाने वाले भी खूब पहुंचते थे, मगर जब से गुटखे का प्रचलन हुआ है,तब से पान की बिक्री प्रभावित हो गई।
पहले लगते थे पांच सात तरह के पान
पहले पांच सात तरह के पान लगते थे। पान लगाना भी एक कला है।जो लोग पान की क्वालिटी के साथ समझौता नहीं करते, वे अच्छा कत्था काम में लेते हैं। सबके पान लगाने का तरीका अलग अलग होता है।
जोधपुर में ब्रांडेड पान ( Branded Paan ) नया ट्रेंड
समय के साथ यह बदलाव जरूर आया है कि पान में कई तरह की ब्रांडेड चीजें मिला कर ब्रांडेड पान खिला रहे हैं। शहर में पान की कई दुकान में नए प्रयोग किए जा रहे हैं। शहर में एक जगह पान की ३६ वैराइटी की लंबी सूची है। इसमें आइसक्रीम वाले पान भी हैं तो कई तरह के फ्लैवर भी हैं।
-हैप्पी, पान विक्रेता, जोधपुर
पान से कैंसर नहीं होता
पान जल का फल है। इसका जायका बहुत अच्छा होता है। जिन्हें पान खाना है तो खाना है, वे ढूंढते हैं कि कहीं आसपास पान की दुकान है क्या?आयुर्वेद में पान को पाचक बताया गया है। एक अहम बात यह है कि तम्बाकू से कैंसर होता है, पान से कैंसर नहीं होता है। हां ब्लड प्रेशर के मरीज को तम्बाकू और किमाम नहीं खाना चाहिए।
- मनोहरलाल भाटी, पान विक्रेता, जोधपुर
जोधपुर के लोग खाते हैं कलकत्ती पान
जोधपुर के लोग करीब ३० साल पहले लंकी पान खाते थे। उस वक्त ज्यादातर लोग यही पान खाते थे। यह पान केरल से आता था। गुटखे का प्रचलन होने के बाद यह पान आना बंद हो गया। अब इस पान की खेती बंद हो गई। पहले गुजरात के चोरवाल से कपूरी पान आता था। यह पान फौजी भाई बहुत पसंद करते थे। जोधपुर के अधिकतर लोग कलकत्ती पान खाना पसंद करते हैं। इसे बंगला मीठा पान भी कहते हैं। इसलिए यहां यह पान ही मशहूर है। यह पान पश्चिम बंगाल मिदनापुर से आता है। यह पान की सबसे बड़ी मंडी है। जोधपुर में कलकत्ती के बाद रेली पान खाने वाले भी हैं। रेली पान घरों में खाया जाता है और यह पान पूजा के भी काम आता है। मगई पान की किस्म तो पापड़ की तरह होती है। पहले पान में मटीरियल होता था, अब सेंटेड पान का चलन है।
-अमरचंद तम्बोली, पान विक्रेता, जोधपुर
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लाइट मसाला सही रहता है
पान लगाने और उसमें मटीरियल मिलाने में अब थोड़ा बदलाव आ गया है। पान में कत्था, चूना, इलायची, सुपारी, गुलकंद, चटनी, इलायची और सुपारी तो सभी डाले हैं, लेकिन बेलगाम, किमाम चटनी वगैरह मिलाने से इसका जायका और अच्छा हो जाता है। लोग मिक्स फ्लैवर पसंद करते हैं। जोधपुर में अलग तरह का तम्बाकू काम में लिया जाता है और अजमेर में अलग तरह का तम्बाकू काम में लेते हैं।
-महेंद्र बोराणा, पान विक्रेता, जोधपुर
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