जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में जोधपुर नगर निगम को जन सुविधाओं के लिए आरक्षित सार्वजनिक भूमि पर उपयोगिता के लिहाज से पार्क और खेल मैदान विकसित करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि आवश्यकता होने पर सामुदायिक केंद्र भी स्थापित किए जा सकते हैं, लेकिन ऐसी सुविधा किसी व्यक्ति विशेष या संस्था को लम्बी लीज या व्यवस्था के तहत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने नगर निगम को यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि सार्वजनिक खुले क्षेत्रों और पार्कों में मनोरंजन एवं खेलकूद गतिविधियों के लिए स्थापित परिसरों को भविष्य में किसी भी संस्थान को नहीं दिया जाए।
मुख्य न्यायाधीश एस.रविंद्र भट्ट तथा न्यायाधीश डा.पुष्पेंद्रसिंह भाटी की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता मौहल्ला विकास समिति की ओर से दायर जनहित याचिका स्वीकार करते हुए नगर निगम को विवाह एवं समारोह स्थल की पंजीयन नीति-2015 में ओपन एवं ग्रीन एरिया का उपयोग शादी, सामाजिक और धार्मिक आयोजनों के लिए करने की अनुमति देने की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।
कमला नेहरू कॉलोनी स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय पार्क को शादी व अन्य समारोह के लिए देने को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर निर्णय देते हुए कोर्ट ने यह कवायद दो महीने में पूरी करने के निर्देश के साथ कहा कि यह दिशा-निर्देश तब तक लागू रहेंगे, जब तक मास्टर प्लान की कड़ाई से पालना सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त नियम लागू नहीं किए जाते। खंडपीठ ने नगर निगम को पंडित दीनदयाल सेवा समिति को पार्क-सामुदायिक भवन में विवाह व अन्य समारोह के आयोजन से रोकने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने दी विस्तृत गाइडलाइन
-ऐसे किसी स्थल का किसी समारोह में उपयोग के लिए कार्यक्रम की अवधि, वर्ष में कुल दिनों के उपयोग के संदर्भ में महीने में 4 दिन से अधिक नहीं (या पूरे वर्ष में कुल 50 दिन) होनी चाहिए।
-प्रत्येक आयोजन के लिए समय को स्पष्ट रूप से इंगित किया जाना चाहिए और इसका कड़ाई से अनुपालन किया जाना चाहिए।
- किसी विवाह या सामाजिक कार्यक्रम को मंजूरी देने के प्रयोजन को लेकर नगर निगम को एक ऑनलाइन बुकिंग पोर्टल बनाना चाहिए। जो अनुमोदित स्थलों में ऐसी सुविधाओं की उपलब्धता की जानकारी दे सके।
- आवेदन को तभी अनुमोदित किया जाए, जब संबंधित व्यक्ति या संगठन कचरा साफ करने की गारंटी देते हुए इसकी योजना पेश करे। निगम को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस प्रयोजन के लिए एक निश्चित राशि आवेदक से अग्रिम प्राप्त की जाए, जिसे केवल तभी वापस किया जाए जब साइट को उस स्थिति में लाया जाए जैसा कि वह आयोजन से पहले थी।
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