जोधपुर.
राजस्थान हाईकोर्ट (rajasthan highcourt) ने खान एवं भू-विज्ञान विभाग (Department of Mines and Geology) के प्रमुख शासन सचिव को पुलिस (rajasthan police) एवं परिवहन विभाग (transport Department) के साथ विचार-विमर्श के बाद अवैध बजरी खनन व परिवहन के खिलाफ कार्रवाई में एकरूपता के लिए दो महीने के भीतर नीति बनाने को कहा है।
मुख्य न्यायाधीश एस.रविंद्र भट्ट तथा न्यायाधीश अशोक कुमार गौड़ की खंडपीठ ने खेमसिंह की ओर से दायर जनहित याचिका की सुनवाई के बाद कई दिशा-निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मोतीसिंह ने कोर्ट को बताया कि अवैध बजरी खनन के मामलों में कार्रवाई करने में पुलिस और राज्य के अन्य महकमों का एक दृष्टिकोण नहीं है।
अवैध बजरी परिवहन (Illegal gravel transport) के कुछ मामलों में एमएमडीआर अधिनियम के तहत एफआइआर दर्ज की जा रही है तो कुछ मामलों में मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है।
कुछ मामले ऐसे भी हैं, जिनमें बजरी को जब्त कर माइनर मिनरल रियायत नियमों के तहत कंपाउंडिंग कर दी गई है।
उन्होंने बताया कि मजिस्ट्रेट अधिकांश वाहनों को मुक्त कर देते हैं। कई मामलों में तो कंपाउंडिंग शुल्क वसूल किए बिना ही वाहन मुक्त किए गए हैं।
खंडपीठ ने कहा कि बजरी के अवैध खनन व परिवहन के मामलों में की जाने वाली कार्रवाई में एकरूपता रहनी जरूरी है।
इसके लिए सरकार को कार्रवाई प्रवर्तन अधिकारियों के भरोसे छोडऩे की बजाय अभियोजन शुरू करना चाहिए।
कोर्ट ने प्रस्तावित नीति और इसके तहत दिए जाने वाले दिशा-निर्देशों को संबंधित विभागों व अधिकारियों को सूचित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि ऐसे सभी मामलों में एकरूपता से कार्रवाई की जा सके।
एक लाख रुपए जुर्माना
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता संदीप शाह ने कोर्ट को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के एक आदेश का उल्लेख करते हुए बताया कि इसमें ऐसे मामलों में एमएमडीआर अधिनियम एवं अन्य प्रासंगिक नियमों के तहत जुर्माना या कंपाउंडिंग राशि के अलावा 1 लाख रुपए से कम शुल्क अधिरोपित नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं।
कोर्ट ने कहा कि अवैध बजरी खनन से भरे जब्त वाहनों को मजिस्ट्रेट द्वारा मुक्त किया जाता है, लेकिन यह ऑटोमेटिक नहीं होना चाहिए।
नियमानुसार कंपाउंडिंग के अलावा एनजीटी के आदेश के अनुसरण में एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाना चाहिए।
बजरी ले जाने की अनुमति नहीं
संबंधित मजिस्ट्रेट या न्यायालय को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि वाहन को छोडऩे के मामलों में बजरी या रेत को ले जाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि अवैध खनन के नतीजतन ऐसी बजरी खरीद की गई है और राज्य में इसका अवैध खनन जारी है।
ऐसी बजरी को वापस उसी स्थान पर डाला जाना चाहिए, जहां से इसका अवैध खनन या निकासी की गई थी। ताकि खनन क्षेत्र की स्थिति बहाल की जा सके। अगली सुनवाई 11 नवंबर को मुकर्रर की गई है।
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