शहर की रफ्तार बढ़ी और ड्रेनेज सिस्टम की थम गई

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जोधपुर.
मानसून सीजन अब समाप्ति की ओर है। पिछले दो-तीन माह में शहर ने जो बड़ी परेशानियां झेली हैं उसमें सडक़ पर गड्ढे और दूसरा है हमारा ड्रेनेज सिस्टम। पिछले करीब दो दशक में हमारे शहर का विस्तार हुआ, लेकिन ड्रेनेज सिस्टम आज भी वहीं ठहरा है। इसका खामियाजा कई कॉलोनियों के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। अभी हालात यह हैं कि बारिश का पानी अब सीवरेज सिस्टम व नालों के जरिए कुछ दूरी पर ले जाकर छोड़ देते हैं। ड्रेनेज सिस्टम को बेपटरी करने वाले तीन प्रमुख नालों की ग्राउंड रिपोट...र्।

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भैरव नाला

कायलाना क्षेत्र से शुरू होकर शहर की कई कॉलोनियों का पानी एकत्रित कर यह शोभावतों की ढाणी के समीप समाप्त हो जाता है। डर्बी कॉलोनी के समीप इस नाले का गंदा पानी वर्ष पर्यन्त भरा रहता है। बारिश के दिनों में हालात ऐसे विकट हैं कि खुले क्षेत्र में पानी भर जाता है।

एक नजर में प्रोजेक्ट
- 8.5 किलोमीटर लम्बा नाला बनना है।- 75 करोड़ जमीन अधिग्रहण पर खर्च होना प्रस्तावित है।

- औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण आगे निर्माण ही नहीं किया।

- शोभावतों की ढाणी के समीप समाप्त हो जाता है यह नाला।
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माता का थान नाला

मंडोर क्षेत्र से शुरू होकर यह नाला कई कॉलोनियों का बरसाती व गंदा पानी लेकर मुख्य बनाड़ रोड पर समाप्त हो जाता है। इस नाले के अधूरा होने के कारण ही मुख्य बनाड़ रोड पर यातायात बाधित रहता है। इसके लिए अब निजी व सरकारी जमीन अधिग्रहण कर जोजरी नदी से मिलाने की प्रक्रिया चल रही है।

एक नजर में प्रोजेक्ट

- करीब 6 किलोमीटर से ज्यादा लम्बाई का नाला नए एलाइनमेंट से बनना है।
- 35 करोड़ से ज्यादा की राशि जमीन अधिग्रहण में प्रस्तावित है।- सैन्य क्षेत्र होने के कारण पिछले लम्बे समय से इसका निर्माण आगे नहीं बढ़ पा रहा है।

- बनाड़ मुख्य रोड के समीप यह नाला सडक़ पर खत्म होता है।

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यूनिवर्सिटी नाला

शहर के कई छोटे-बड़े नालों को समाहित करता हुआ यह नाला यूनिवर्सिटी न्यू कैम्पस के पीछे समाप्त हो जाता है। यहां से पानी पॉलिटेक्निक कॉलेज परिसर व एयरफोर्स क्षेत्र में फैलता है। न तो यूनिवर्सिटी प्रशासन और न ही सैन्य क्षेत्र से इस नाले को निकालने की अनुमति मिल पा रही है।

एक नजर में प्रोजेक्ट
- 10 किलोमीटर से अधिक लम्बाई का नाला बनाना है।

- एक बार पहले टैंडर प्रक्रिया अपनाई गई, सिंगल टैंडर होने से इसे रोक दिया गया।
- यूनिवर्सिटी व सैन्य क्षेत्र में निर्माण अनुमति नहीं मिलने से परेशानी है।

- न्यू कैम्पस के पीछे नाला समाप्त हो जाता है, फिर पानी कॉलोनियों में फैलता है।

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एक्सपर्ट व्यू :::

शहर का ड्रेनेज मास्टर प्लान जो बना उसे ही यदि लागू किया जाता है तो हमारे शहर की ड्रेनेज समस्या दूर हो सकती है। जो तीन प्रमुख नाले हैं वह कई सालों से अधूरे हैं। करीब 15-20 साल पहले भी इन नालों को पूरा करने की प्रक्रिया चलती थी। लेकिन जमीन अधिग्रहण इसमें बड़ी समस्या थी। जब तक नालों को जोजरी नदी में नहीं मिलाया जाता तब तक इस समस्या का स्थाई समाधान नहीं हो सकता। यदि एक साथ इतना बजट उपलब्ध नहीं हो सकता तो एक-एक कर काम करवाया जा सकता है। शहर के कई छोटे-बड़े नाले भी इन्हीं में मिलते हैं। अभी बरसाती पानी हम शहर से कुछ किलोमीटर आगे ले जाकर छोड़ देते हैं। लेकिन यह स्थाई समाधान नहीं है।

- राजेन्द्र पुरोहित, सेवानिवृत्त अधिशासी अभियंता, यूआईटी जोधपुर।



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