जोधपुर.
राजस्थान हाईकोर्ट (rajasthan highcourt) में गुरुवार को रॉबर्ट वाड्रा (robert vadra) से जुड़ी कंपनी स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी एलएलपी (Sky Light Hospitality LLP) एवं एक अन्य याचिका की तय समय से पहले सुनवाई और अगली तारीख मुकर्रर करने को लेकर गुरुवार को दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के बीच गहमागहमी हो गई।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से अधिवक्ता ने नियत समय दो बजे से पहले नई तारीख देने पर आपत्ति जाहिर करते हुए लिखित में प्रार्थना पत्र पेश किया।
जिस पर प्रत्युत्तर देने के लिए याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने समय मांगा। कोर्ट ने अगली सुनवाई 24 अक्टूबर को मुकर्रर की है।
न्यायाधीश मनोज कुमार गर्ग की एकलपीठ में स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी एलएलपी तथा महेश नागर की ओर से दायर दो मामले दोपहर दो बजे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध थे।
कोर्ट ने 12 सितंबर को केंद्र सरकार के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल राजदीपक रस्तोगी के आग्रह पर मामले की सुनवाई दोपहर 2 बजे मुकर्रर की थी। सुबह कोर्ट की सुनवाई शुरू होने पर दोनों मामलों का जल्दी ही नंबर आ गया, जिस पर वाड्रा की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता केटीएस तुलसी जिरह के लिए खड़े हुए।
इस बीच, एक अधिवक्ता ने कोर्ट में यह जानकारी दी कि मामले की सुनवाई पूर्व में ही 2 बजे तय है और केंद्र की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अपना पक्ष रखेंगे।
कोर्ट ने सूचीबद्ध मामलों की संख्या को देखते हुए सुनवाई दीपावली बाद 5 नवंबर को मुकर्रर कर दी। दोपहर 2 बजे रस्तोगी और अधिवक्ता बीपी बोहरा ने कोर्ट के समक्ष एक लिखित प्रार्थना पत्र पेश करते हुए इस पर आपत्ति जताई कि याचिकाकर्ताओं का यह दायित्व था कि वह कोर्ट को सुनवाई का समय तय होने की सूचना देते, लेकिन उन्होंने बिना प्रवर्तन निदेशालय के अधिवक्ताओं को सूचना दिए सुनवाई की नई तारीख तय करवा दी।
लुका-छिपी खेल रहे याचिकाकर्ता : रस्तोगी
रस्तोगी ने कहा कि याचिकाकर्ता लुका-छिपी का खेल खेल रहे हैं। पिछले साल से उनके पक्ष में एक तरफा स्थगन आदेश प्रभाव में है।
जिसे वेकेट करवाने के प्रार्थना पत्र पर बहस करने की बजाय हर बार समय लिया जा रहा है। रस्तोगी की बहस के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता कुलदीप माथुर तथा विकास बालिया ने भी प्रतिवाद करना शुरू कर दिया।
उन्होंने कहा कि यह कहना सरासर गलत है कि कोर्ट को सुनवाई के समय के बारे में नहीं बताया गया। सुनवाई शुरू होने पर उनकी तरफ से एक अधिवक्ता मौजूद थे। न्यायाधीश गर्ग ने कहा कि उस अधिवक्ता की मौजूदगी में ही अगली तारीख दी गई।
जबकि रस्तोगी ने कहा कि जिस अधिवक्ता का नाम लिया जा रहा है, वे केंद्र के अधिवक्ता नहीं है और न ही उन्हें अधिकृत किया गया था। अधिकृत व्यक्ति के रूप में पुखराज सीरवी का शपथ पत्र पेश करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी नहीं सुनी गई।
अब पहले प्रार्थना पत्र पर होगी सुनवाई
प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पेश नए प्रार्थना पत्र के बाद अब कोर्ट पहले इस विवाद को सुलझाने 24 अक्टूबर को सुनवाई करेगा। उसके बाद स्टे वेकेशन की अर्जी पर बहस होगी।
गौरतलब है कि स्काई लाइट कंपनी के साझेदार रॉबर्ट वाड्रा और उनकी मां मॉरीन वाड्रा है। जिनकी गिरफ्तारी पर पूर्व में रोक लगाई गई थी।
इसके साथ ही इसी कंपनी से जुड़े महेश नागर की याचिका भी विचाराधीन है। प्रवर्तन निदेशालय बीकानेर के कोलायत में जमीन खरीद-फरोख्त को लेकर स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी एलएलपी कंपनी के साझेदारों के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की धारा 2 के तहत साक्ष्य एकत्रित करने के लिए जांच कर रहा है।
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