विभागों की लापरवाही से जोधपुर के ये डिवाइडर बन रहे ‘मौत के कट’, यातायात नियंत्रण बोर्ड ने जताई चिंता

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अविनाश केवलिया/जोधपुर.राज्य सरकार की सख्ती कहें या स्थानीय प्रशासन की पहल, शहर को साफ-सुथरा बनाने के तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। इस काम में नित नई कमियां लगातार सामने आ रही है। पिछले दिनों जिला प्रशासन की टीम ने 15 से ज्यादा सडक़ों पर सिर्फ डिवाइडर को सुंदर बनाने के निर्देश दिए थे। लेकिन हकीकत यह है कि डिवाइडर के प्रति अलग-अलग विभागों की लापरवाही के कारण हर माह 10 से ज्यादा सडक़ हादसे होते हैं।

शहर के यातायात को सुगम बनाने और इससे सम्बंधित परेशानियों को दूर करने वाले यातायात नियंत्रण बोर्ड (टीसीबी) ने भी डिवाइडर के खतरे को गंभीर मानते हुए सभी विभागों को इसे दूर करने के निर्देश दिए हैं। डिवाइडर के इन खतरों को लेकर यातायात पुलिस भी चिंतित है। हालात यह है कि डिवाइडर की तकनीकी कमियों को लेकर होने वाले हादसों को सिर्फ बेरिकेडिंग के भरोसे ही रोका जा रहा है।

प्रशासन खुद मानता है खतरा

- नगर निगम कार्यालय के सामने पुलिया समाप्त होने के साथ ही डिवाइडर का कट को टीसीबी ने गंभीर माना है। यहां कई वाहन भिड़ चुके हैं। इस कट को बंद करना बहुत जरूरी है। यातायात पुलिस ने बेरिकेडिंग लगाकर डिवाइडर बंद करने का प्रयास किया। लेकिन दुपहिया वाहन चालक गली निकाल लेते हैं।

- चौपासनी हाउसिंग बोर्ड थाने के सामने तिराहे के कट भी हादसों का कारण बनता जा रहा है। यहां भी बेरिकेडिंग कर कट को बंद किया गया है। लेकिन यह स्थाई समाधान नहीं है।

- चौपासनी रोड पर जूना खेड़ापति मंदिर के सामने डिवाइडर कट कई हादसों का गवाह है। जब विभागों ने इस पर ध्यान नहीं दिया तो यातायात पुलिस ने इसे बेरिकेडिंग लगा बंद कर दिया।

लापरवाही एक नजर में
- 15 से ज्यादा जगह डिवाइडर पर गलत तरीके से तोडकऱ कट लगाए गए हैं।
- 10 से ज्यादा ऐसे डिवाइडर कट और घुमटी खतरा बने हुए हैं।
- 20 से ज्यादा डिवाइडर कट बेरिकेडिंग से ही बंद किए गए हैं।
- 10 से ज्यादा हादसे हर माह इन गलत डिवाइडर कट से होते हैं।

सुंदरता पर भारी हो सुरक्षा
शहर के डिवाइडर को सुंदर बनाने के लिए तो प्रशासन समय-समय पर निर्देश देते हैं। इसके लिए लाखों के टैंडर भी जारी हुए हैं। लेकिन सुरक्षा को तवज्जो नहीं दी जा जाती। टीसीबी के निर्देश की सख्ती से पालना की जाए तो डिवाइडर सुंदर नहीं बल्कि सुरक्षित बन सकते हैं। लेकिन सडक़ों का स्वामित्व अलग-अलग विभागों के पास होने के कारण सुरक्षित डिवाइडर की जिम्मेदारी सिर्फ यातायात पुलिस के कंधों पर आ गई है।



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