जोधपुर.
नाबालिग छात्रा के यौन उत्पीड़न मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम (asaram) को एक बार फिर राजस्थान हाईकोर्ट (rajasthan high court) से झटका लगा। कोर्ट ने सोमवार को दूसरी बार सजा स्थगित करने का आसाराम का प्रार्थनापत्र खारिज कर दिया।
न्यायाधीश संदीप मेहता और न्यायाधीश विनीतकुमार माथुर की खंडपीठ में सजा स्थगन प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के दौरान आसाराम के अधिवक्ता शिरीष गुप्ते ने कहा कि जिस समय यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज करवाया गया था, उस वक्त पीडि़ता बालिग थी।
इसका प्रतिवाद करते हुए पीडि़ता के अधिवक्ता पीसी सोलंकी ने कहा कि ट्रायल के दौरान भी आरोपी की ओर से इस संबंध में जांच का आग्रह किया गया था, जिसमें यह सामने आया था कि पीडि़ता नाबालिग है।
राजस्थान हाईकोर्ट में इसकी निगरानी खारिज हो चुकी है। गुप्ते ने बहस आगे बढ़ाते हुए कथित घटनाक्रम और एफआइआर दर्ज करने में हुई देरी पर सवाल उठाए, जिसे खंडपीठ ने ज्यादा महत्वूपूर्ण नहीं माना।
कोर्ट के रुख को देखते हुए गुप्ते ने याचिका पर बल नहीं ( नोट प्रेस) देने अनुरोध किया, जिस पर खंडपीठ ने प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया। बाद में गुप्ते ने कोर्ट से जल्दी सुनवाई का पुन: अनुरोध किया, जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने जनवरी के दूसरे सप्ताह में अपील की नियमित सुनवाई प्रारंभ करने के निर्देश दिए हैं।
इससे पूर्व 26 मार्च को सजा स्थगन का पहला प्रार्थना पत्र खारिज करते समय भी कोर्ट ने आसाराम की ओर से अपील पर जल्द सुनवाई की प्रार्थना मंजूर की थी। लेकिन पिछली दो सुनवाई पर आसाराम की ओर से मुंबई से वरिष्ठ अधिवक्ता के नहीं आने पर कोर्ट ने अपील को सामान्य प्रक्रिया में सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए थे।
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