जोधपुर.
राजस्थान हाईकोर्ट (rajasthan highcourt) ने भीलवाड़ा जिले के कोठारी नदी (Kothari River of Bhilwara District) क्षेत्र में भाटेवर के निकट बजरी के अवैध खनन (Illegal mining of gravel) को देखते हुए सीसीटीवी निगरानी से लैस एक चैकपोस्ट की जगह कपड़े के टेंट में अस्थायी पोस्ट बनाने पर हैरानी जताई है।
कोर्ट ने कहा कि अस्थायी चैकपोस्ट के फोटो से यह पता नहीं चलता कि यह किस जगह है और जिस नदी से बजरी निकाली जा रही है, उससे कितनी दूर है।
मुख्य न्यायाधीश एस.रविंद्र भट्ट तथा न्यायाधीश अशोक कुमार गौड़ की खंडपीठ में एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता करणसिंह राजपुरोहित ने कोर्ट के पूर्ववर्ती आदेश की पालना में एक शपथ पत्र पेश कर बताया कि भाटेवर के निकट सीसीटीवी निगरानी से लैस एक चैकपोस्ट स्थापित की जा चुकी है।
इसका प्रतिवाद करते हुए याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने चैकपोस्ट के फोटो कोर्ट के समक्ष पेश किए, जिसे देखकर खंडपीठ ने हैरानी जताई कि एक वीरान सी जगह पर कपड़े के टेंट को चैकपोस्ट कैसे बताया जा रहा है।
खंडपीठ ने कहा कि फोटो से कथित चैकपोस्ट की लोकेशन का पता नहीं चलता। राज्य सरकार को एक साइट मैप पेश करने के निर्देश दिए गए हैं, जिनमें चैकपोस्ट की लोकेशन बताई गई हो।
कोर्ट ने कहा कि चैकपोस्ट गांव के निकट ऐसे स्थान पर होनी चाहिए, जहां अवैध बजरी खनन होता हो, न कि सुदूर इलाके में। अगली सुनवाई 17 अक्टूबर को होगी।
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