अमित दवे/जोधपुर. नगर निगम, जेडीए और पीडब्ल्यूडी के अधीन आने वाली सडक़ों पर तो हमने झटकें खाए ही है। इन क्षतिग्रस्त सडक़ों की बदहाली भी जगजाहिर है। लेकिन औद्योगिक क्षेत्रों में रीको के अधीन सडक़ें भी खस्ताहाल हैं। विकास की धुरी कहे जाने वाले उद्योगों को सुविधा देने के नाम पर रीको की ओर से सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। औद्योगिक क्षेत्रों में क्षतिग्रस्त सडक़ें, नालों को दुरुस्त कराने के मामले में रीको भी अन्य सरकारी एजेंसियों की तरह फेल साबित हुआ है।
उद्यमियों की शिकायत है कि रीको की ओर से सालाना डेढ़ से दो करोड़ रुपए सर्विस चार्ज के नाम पर वसूले जाते हैं जबकि उनके अनुरूप सुविधाएं नहीं मिल रही है। बासनी औद्योगिक क्षेत्र की समस्याएं पुरानी हैं, लेकिन उनका सही इलाज नहीं है। बासनी क्षेत्र में सडक़ें टूटी पड़ी हैं, नालें चॉक हो गए हैं और अधिकांश फैक्ट्रियों के बाहर कचरे का मलबा पड़ा है। फैक्ट्रियों के पास से गुजरने वाले नाले लाल,पीले, नीले बदबूदार गंदे पानी से अटे पड़े है। नालों में कचरा भी पड़ा है। बासनी क्षेत्र के लगभग गलियों के यही हाल हैं। पूरे क्षेत्र में सडक़ें टूटी हुई हैं, जिनकी मरम्मत भी लंबे समय से नहीं हुई है।
जनप्रतिनिधि गंभीर नहीं
बासनी औद्योगिक, डर्बी टेक्सटाइल क्षेत्र, भैरव नाला आदि क्षेत्रों की स्थिति खराब है। जनप्रतिनिधि भी औद्योगिक क्षेत्र की समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं है। कई बार जनप्रतिनिधियों को बताया गया लेकिन उन्होंने रूचि नहीं दिखाई।
आशाराम धूत, वरिष्ठ उद्यमी
रीको की ओर से औद्योगिक क्षेत्रों में सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। अभी बारिश के कारण रीको औद्योगिक क्षेत्र की हालत ज्यादा खराब है। कुछ दिन बाद बारिश का सीजन निकलने के बाद सडक़ व नाला मरम्मत कार्य पुन: चालू कराया जाएगा।
विनीत गुप्ता, वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबंधक, रीको
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