अभिषेक बिस्सा/जोधपुर. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जोधपुर एम्स) निगेटिव प्रेशर आइसोलेशन वार्ड बनाएगा। वर्तमान में एम्स बिल्डिंग की डिजाइन में ऐसे आइसोलेशन वार्ड का प्रावधान ही नहीं है। इस वार्ड को बनाने के लिए मापदंड देखे जाएंगे। इसके बाद एम्स में स्वाइन फ्लू व कांगो फीवर का इलाज शुरू हो जाएगा।
एम्स अधीक्षक डॉ. अरङ्क्षवदकुमार सिन्हा ने बताया कि निगेटिव प्रेशर आइसोलेशन वार्ड का प्रस्ताव तैयार है। दरअसल, पॉजिटिव प्रेशर आइसोलेशन वार्ड में सारी एयर बाहर निकलती है, लेकिन इसमें बाहर की एयर अंदर नहीं घुस पाती। रूम को टेक्निकली इसी तरह डिजाइन किया जाता है। इसमें कीमोथैरेपी, इंम्यूनोकोप्रोमाइज व ट्रांसप्लांट संबंधी पेशेंट रखे जाते हैं। ऐसे आइसोलेशन वार्ड एम्स की बिल्डिंग में हंै।
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क्या है निगेटिव प्रेशर आइसोलेशन वार्ड
निगेटिव प्रेशर आइसोलेशन वार्ड में अंदर की संक्रमित एयर बाहर नहीं जाती। इस तरह के वार्ड में स्वाइन फ्लू व क्रिमियन कांगो हैमरेजिक फीवर जैसे रोगियों का उपचार किया जाता है। डॉ. सिन्हा ने बताया कि खाली कमरे को बगैर तकनीक अपनाए आइसोलेशन में तब्दील नहीं कर सकते। इसके अलावा एम्स का सेंट्रल कूलिंग प्लांट सिस्टम भी खाली कमरे को आइसोलेशन में तब्दील करने पर जोखिमपूर्ण साबित हो सकता है। ऐसे में अन्य मरीजों को खतरा हो सकता है। क्योंकि स्वाइन फ्लू जैसे रोग हवा से फैलते हैं।
एम्स को चाहिए 19 आइसीयू
जोधपुर एम्स में वर्तमान में 707 बैड, 13 मुख्य और 3 माइनर ऑपरेशन थिएटर हैं। एम्स प्रशासन को वर्तमान में अपने विभागों के मुताबिक कम से कम 19 विशिष्ट आइसीयू की दरकार है। वर्तमान में एम्स में 960 बेड की योजना प्रस्तावित है। इसके अलावा 30 मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, 70 बेड का वयस्क आइसीयू, 16 बैड का कार्डियक आइसीयू, 30 बेड के बाल चिकित्सा एवं नवजात आइसीयू और सुपरस्पेशलिएटी ब्लॉक तैयार करने की योजना है।
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